पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)
Padmavat with Hindi Commentary
मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंपै सुठ ऊँच नीच तेहिकेरा । धनी पाव निरधनी मुख हेरौ ॥
लाख करोरहि वस्तु बिकाई । सहसनै केर न कोउ ओनाई ॥
दो० सबहिं लीन्ह बिसहना, औ घर कीन्ह बहोरै । (७४)
ब्राह्मण तहाँ ले का, गांठ सांठ सुठथोर ॥
झुरी ठाढ़ हौं काहेक आवा । बनजँ न मिला रहा पछतावा ॥
लाभै जानि आयौं यह हाटँ । मूर गँवाय चल्यों यह बाटँ ॥
का मैं मरन सिखावन सिखी । आयौं मरै मीचै हत लिखी ॥
आपनचलत सो कीन्हा झौंनी । लाभै न देखि मूरभइ हॉनी ॥
का मैं बोआ जन्म औ भूंजी । खोय चल्यों घरहुँ की पूँजी ॥
जेहि व्योहरिया कर व्योहारू । कालै देब जो छेंकैहि बारू ॥
घर कैसे पैठव मैं छूछे । कौन उतरै देहौं तेहि पूँछे ॥
दो० साथचला संतें बिछला, भये बिच समुद्रपहार । (७५)
आशनिराशाही फिरौं, तूविधि देहि उधार ॥
तबहीं व्याधै सुआँ लैआवा । कंचनबरनै अनूपै सुहावा ॥
बेचै लाग हाँटै लै ओही । मोल रतनमाणिकै जेहिहोही ॥
सुहिं कोपूँखपतंग मँडारें । चलन देख आछे मन मारें ॥
ब्राह्मण आय सुआँ सो पूछा । वह गुणवन्तकिनिरगुणछूंछा ॥
कहु पंखी जो गुणतोहिपाहां । गुणन छिपाये हृदये माहां ॥
हम तुम जात ब्राह्मण दोऊ । जात जात पूँछै सब कोऊ ॥
पण्डित हौ तो सुनावहु वेदू । बिन पूँछे पाई नहिं भेदू ॥
पाद-टिप्पणी (Footnotes):
दौलतवाला १ बेदौलत २ देखना ३ हज़ार ४ लौटना ५ बेपूंजी ६ माल ७
फ़ायदा ८-१३ बाज़ार ६-२३ राह १० मौत ११ होशियारी १२ नुक़सान १४
रोकना दरवाज़ा का १५ जवाब १६ ईमान १७ ब्रह्मा १८ बहेलिया १६ तोता
२०-२५-२७-२८ सोने का रंग २१ बेमिसाल २२ जवाहऱात २४ उड़नेवाले
जानवर २६ दिल २६॥