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पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

Padmavat with Hindi Commentary

मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा

DevanagariAwadhipublished318 पृष्ठ

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पृष्ठ 296

पद्मावत। ३६५
बादशाह भूमीपति राजा। सन्मुख है न हमीरहिंलाजा॥
बत्तीसलाखतुंरी जेहिसाजहिं। बीससहसहस्तीदल गाजहिं॥
जबहीं आय चढ़े दल ठाटा। देखत जैस गगन घनघटा ॥
चमकहिं खड्ग जोबीजैंसमाना। डमरहिंगलगजहेंहिंनिशाना॥
वरसहिं सेलें बानैं घनघोरा। धीरज धीर न बांधे तोरा ॥
दो० जहां दलपती दलमलहिं, तहां तोरका काज।
आज गवन तोर आवै, बैठमान सुखराज ॥
मातन जानेसि बालकेँआदी। हौं बादला सिंहे रन बादी ॥
सुनगजजूहें अधिकजिउतपा। सिंहे जातकहुँरैनाहिं खिपा ॥
तवलग गाजनैं गाज सँडेला। साँहैं शाहसों जुरों अकेला ॥
को मोहिं साँह होय मै मन्ता। फारौं सूँड़ उखारों दन्ता ॥
जरों स्वामैं संकरे जस तारा। ओ बर्ले जस दुर्योधन मारा ॥
अङ्गदकोप पांव जस राखा। टेकों कटकेँ छतीसो लाखा ॥
हनुमत सरस जङ्घपर जोरों। दहौं समुद्र स्वामें बँद छोरों ॥
दो० जो तुम मात जसोदी, मोहिं न जानो बार।
जहँ राजा बलबांधा, छोरों पैठ पतार ॥
बादल गवन जूझकहँ साजा। तैसेहिंगवन आय घरबाजाँ ॥
लिये साथ गवने कर चारू। चन्द्रवदन रचकीन्हशिंगारू ॥
मांग-मोति भर सेंदुर पूरा। बैठ मयूरे बाँक तस जूरा ॥
भौंहैं धनुर्पे टकोर परीखी। काजर नयन मारशरतीखी ॥
घोड़ा १ हाथी २ आसमान ३ तलवार ४ बिजुली ५ परहरा ६-१४
गोला ७ तीर ८ बड़े राजा ६ छोटा लड़का १० शेर ११-१३ हाथियों का
हलक़ा १२ सामने १५ मस्त १६ मालिक का काम करों १७ नाम महाशूर-
वीर १८-१६ फ़ौज २० राजा २१ पहुँचा २२ मोर २३ कमान २४ तीर २५
कटीली २६ ॥