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पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

Padmavat with Hindi Commentary

मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा

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पृष्ठ 282

पद्मावत। २८१
जस कामरू चमारिन लोना । कौनहिं छल पढ़त कै टोना ॥
विषहर नाचहिं पढ़तें मारी । औथर मूंदे घाल पेटारी ॥
बृक्षै चलैं पढ़तें के बोला । नदी उलटवहि परबत डोला ॥
पढ़त हरि पण्डित मतिघेरी । और को अन्धगूं ग औबहिरी ॥
पढ़त ऐसे देवतहिं लागा । मानुष का पढ़त सों भागा ॥
पढ़त कै हठ काढत पानी । कहां जाय पद्मावत रानी ॥
दो० दूती बहुत पैंचे कै बोली पढ़त बोल ।
जाकर सत सुमेरु है, लागे जगत न डोल ॥
दूती बहुत पकावन सांधी । मोतिन लड्डू खरोरा बांधी ॥
माठ पेराकें पेठे पापर । पहिर बूझ दूती के कापर ॥
लै पूरी भरडाल अनूती । चितौर चली पैंचैं कै दूती ॥
वृद्ध बैस जो बांधे पाऊं । कहां सो यौवन कित बोसाऊं ॥
तन बूढ़ा मन बूढ़ न होई । बल न रहा लालच जें होई ॥
कहां सो रूप जगंत सबरातौ । कहां सो गर्व हस्ति जसमाता ॥
कहां सो तीर्ष नयन तनठाढ़ा । सबै मार यौवन पुनि काढ़ा ॥
दो० मुहम्मद वृद्ध जो नइचलै, काह चलै भुंइ टोइ ।
यौवन रतन हेरान है, संकै धरती महँ होय ॥
आय कुमोदनि चितौर चढ़ी । जोहन मोहन पढ़त पढ़ी ॥
पूछ लीह रनवास बरोठा । पैठ पँवरै भीतर बहु कोठा ॥
जहँ पद्मावत शशि उजियारी । लै दूती पकेवान उतारी ॥
हाथ पसार धाय के भेंटी । चीन्ही नहिं राजा की बेटी ॥
सांप १ मन्त्र २-४ पेड़ ३ क़ौलमज़बूत ५-८ ईमान, ६ मोतीचूरके ल-
डुआ ७ खरीदार ६ दुनिया १० लाल ११ शहर १२ हाथी १३ कट ली १४
शायद १५ बहुत तरह के मन्त्र १६ दरवाज़ा १७ चांद १८ ॥