पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)
Padmavat with Hindi Commentary
मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२७८ पद्मावत ।
कोउ न बहुरा पुनि हर देशू । केहि पूछहुँ को कहै सँदेशू ॥
जो कोइ जाय तहां कर होई । जो आवे कुछ जान न सोई ॥
अगम पंथे पिय तहां सिधावा । जोरे गयो सो बहुर न आवां ॥
कुवांदार जल जैसो बिलोवा । डोल भरा नयनहिं वन रोवा ॥
लेजुरि भई नांहिं बिन तोहीं । कुवां परीधर काढेसिमोही ॥
दो० नयन डोल भर ढारै, हिये न आग बुझाय ।
घड़ी घड़ी जियावै, घड़ी घड़ी जिव जाय ॥
नीर गँभीरं कहां हो पिया । तुम बिन फाटै सरवर हियाँ ॥
गयो हेराय बिरह के हाथा । चलत सरोवर लीन्हेन साथा ॥
चरत जो पंखे केलि कर नीरा । नोर कठिन कोउ आवन तीरा ॥
कमल सूख पखुरी बेहिरानी । गलगल कै मिल लौर हेरानी ॥
बिरह रेत कंचन तन लावा । चून चून कै खेह मिलावा ॥
कनकैकै जो कनकनै है बेहिरोई । पिय पै छार समेटो आई ॥
बिरह पवन यहि छार शरीरू । छारहि आन मिलावहु नीरू ॥
दो० अबहुँ जियाविहु के मया, बिथुरी छार समेट ।
नइकायौ अवतरै नव, दर्श तुम्हारे भेट ॥
नयन सीप मोती तस आशू । तंतैं ततपरहिं करत न नाशू ॥
पदक पदारथ पद्मिन नारी । पिय बिन भइ कौड़ी बेरेबारी ॥
सँग ले गयो रतन सब ज्योती । कंचन क्या कांच भइ पोती ॥
बूड़त हों दुख दग्धे गँभीरी । तुम बिन कंत लाव को तीरी ॥
मुश्किल राह १ लौट २ पद्मावत ३ रस्सी ४ खाविन्द ५ छाती ६-६
पानी गहिरा ७ तालाब ८-१० जानवर परिन्द ११ अलग १२-१६ धूर १३-
१६-२० मिलना १४-१५ सोना १७-२७ रेज़ारेज़ा १८ पानी २१ बदन २२
पैदा होना २३ गर्म २४ लाल जवाहर २५ मोल २६ आगमारी २८
किनारा २६ ॥