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पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

Padmavat with Hindi Commentary

मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा

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पृष्ठ 253

२५२ | पद्मावत ।
जेहिकी ज्योति जाहिं उपराहीं । जहँ ताकहिं चूकहिं तहँ नाहीं ॥
अष्टधात के गोला छूटहिं । गिरि पहाड़ चून होय फूटहिं ॥
इकवारहिं सब छूटहिं गोला । गरजै गगनं धर्तिसबडोला ॥
फूटे कोटँ फूट जनु शीला । उड़हिं बुर्ज जायँ सब पीसा ॥
दो० लंका रावटै जस भई, दाह पड़ा गढ़ सोय ।
रावणभालेंजोजरलिखो, कहुकिमअजरसोहोय॥
राजाकेर लाग गढ़ धुई । फूटे जहां सँवारहि सोई ॥
बांकी वरसहिं वानकै फेरइ । रातहिं कोट चित्र कै लेइ ॥
गाजे गगनं चढ़ा जस मेघा । वरसहिं वज्र सलिलको ठेघा ॥
सौसौ मनकें वरसहिं गोला । वरसहिं टपकतीरजसचोला ॥
जानहु परी स्वर्ग हत गाजाँ । फाटी धर्ति आय जो नाजाँ ॥
गरगजें चूर चूर होय परहीं । हस्तिं घोर मानुप संहरहीं ॥
सबहिं कहा अब परलै आवा । धर्ती स्वर्ग जूझ तस लावा ॥
दो० उठो वज्र सनमुख जरे, होय इक डङ्गोईं लाग ।
जगत जरै चारहुँदिशा, कोरे बुझावै आग ॥
तबहूँ राजा हिये १७ न हारा । राजपँवैरै १८ पर रचा अखारा ॥
सौहें शाह कर बैठक जहां । सामहिं नाच करावै तहां ॥
जंत्रपखावजं २० आदिजोबाजा । सुरैमन्दिर २१ खावै २२ भलसाजा ॥
बीनें २३ निपातककमायजें २४ गहे । बाजउमरेंती २५ अति कहकहे ॥
चंगें २६ उपंगें २७ नाँदें २८ सुरै २९ तूरा । सुहैरं ३१ बंसै ३२ बाजे भल तूरों ॥
आसमान १-७ क़िला २ राख ३ माथा ४ ढांक बनानेवाला ५ तसवीर ६
कड़े पत्थर के गोले ८ आसमान से बिजुली गिरी ६ पहुँचना १० मर-
हता ११ हाथी १२ मरना १३ क़यामत १४ पत्थर १५ इक तरफ़ा १६ दिल
१७ खास महल १८ सामने १६ नाम बाजा २०-२१-२२-२३-२४-२५-२६-
२७-२८-२६-३०-३१-३२ ॥