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पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

Padmavat with Hindi Commentary

मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा

DevanagariAwadhipublished318 पृष्ठ

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पृष्ठ 233

१३२ पद्मावत ।
जो तिल देख जाय जर सोई । बायें दृष्टि काह जन होई ॥
जानहुँ भँवर पद्म पर टूटा । जीव दीन्ह औ वहीं न छूटा ॥
देखत तिल नयनहिं गा काढ़े । और न सूझे सो तिल छांढ़े ॥
तेहिपर अलकैं मंजरी डोला । छुवैसोनागिन सुरंग कपोलों ॥
दो० रक्षा करै मयूर वह, नागिन हियें पर लोट ।
केहिरेजर्ग कोउछुइसकै, दुइपरर्वतकी ओट ॥
ग्रीवैं मयूर केर जस ठाढ़ी । कोड़े११ फेर कँडेरें१२ काढ़ी ॥
धनि वह ग्रीव का बरनो करा । बांक तुरंगैं जान गहि धरा ॥
घरन परेवों ग्रीव उठावा । चहै बोल तमचोरै सुनावा ॥
ग्रीव सुराही के अस भये । अमी पियाला कारन नये ॥
पुनि तेहि ठांवे परी त्रयरेखाँ । तेहिसो ठांउँ होय जो देखा ॥
कनक तार सोने की करा । साज कमल तेहि ऊपर धरा ॥
सूर्य किरनहतग्रीवैं निरमैली । देइ पैगें जात हियें चली ॥
दो० नागिन चढ़ी कमलपर, चढ़के बैठ कमंठ ।
करैं पसार जो कालकहँ, सो लागै वह कंठ ॥
कनकदंडै दुइ बनी कलाई । डांडी फेर कमल जनु लाई ॥
चँदन गाभकी भुजा सँवारी । जन सो बेल कमल पौनारी ॥
तेहि डांडी सँग कमल हतोरी । एक कमल की दोनों जोरी ॥
सहजहिं जानहुँ मेहँदी रची । मुक्ताहल लीन्हे जनु घुंघुची ॥
करपल्लवैं जो हथोरिन साथा । वै सब रक्त भरीं तेहिं हाथा ॥
निगाह १ कमल २ बाल ३ लालगाल ४ निगहवानी ५ मोर ६ छाती ७
दुनिया ८ तथा छाती ६ गर्दन १०-२० खराद ११ खरादी १२ घोड़ा १३
कबूतर १४ चिड़िया १५ जगह १६-१८ तीन लकीर १७ सोना १६ साफ़ २१
क़दम २२ दिल २३ जान से गुज़र जाय २४ सोने की दण्डी २५ नाल २६
मोती २७ अंगुली २८ ॥