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पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

Padmavat with Hindi Commentary

मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा

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पृष्ठ 228

पद्मावत । २२७
बिहँसी शशि तरईं जनुपरीं। कैसो रयनि छूटे फुलझरी ॥
चमक वीजै जस भादौं रैनी। जगत दृष्टि भरही उड़ेनी ॥
काम कटाक्ष दृष्टि विष बसा। नागिन अलकँ पलकमहँ डसा ॥
भौंह धनुष परंत काजल बूड़ी। वह भइ बानुकें हौं भइ ऊँड़ी ॥
मार चली मारतहूँ हँसा। पाछे नाग रहा हौं डसा ॥
दो० काल घाल पीछे रखा, गरुड़ न मन्तर कोय।
मोर पीठ वह बैठा, कासों पुकारों रोय ॥
बेनी १२ छोर झोर जो केशा। रैनि होय जगदीपकँ लेशा ॥
शिरहत विषहरैं परी झुइँ बारा। सगरे देश भयो अँधियारा ॥
सकपकाहिं विष भरे पसारे। लहरहिं भर लहकहिं अतिकारे ॥
जानहुँ लोटहिं चढ़े भुअङ्गाँ। वेधी बास मलयगिरि अङ्गा ॥
लरहिं मुरहिं जनु मानहिं केली। नाग चढ़े मालति कै बेली ॥
लहरैं देइ जानहु कालिन्दी। फिर फिर भँवर भये चित बन्दी ॥
चँवर धरत आळी चहुँपासा। भँवर न उड़हिं जो लुब्धे बासा ॥
दो० होय अँधेर घने विवि चमके, जयहिं चीर गहि झांप।
केशौ नाग कित देख मैं, सँवरि सँवरि जिय कांप ॥
मांग कनकें जो सेंदुर रेखा। जन बसन्त रातौं जग देखा ॥
गइ पत्रावलि पाटी पारी। और चि चित्रविचित्र सँवारी ॥
भई उरेह पण्डुरैं सब नामा। जनु बकें बिखर रहे घनश्यामां ॥
यमुना मांझ सरस्वती मांगा। दुहुँदिश दिये तरंगने गांगा ॥
चांद १ छोटे नखत २ बिजुली ३-२२ निगाह ४-७ जुगनू ५ तिरछी
चितवन ६ बाल ८-२३ पलक ६ तीरअन्दाज़ १० निशाना ११ चोटी १२
रात १३ चिराग़ रोशन १४ सांप १५-१६ चन्दन १७ यमुना १८ दिल
फँसाना १६ लपटना २० बादल २१ सोना २४ लाल २५ नाम दाया २६
बहुत अच्छी २७ फूल २८ बगुला २६ बादल सियाह ३० लहर ३१ ॥