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पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

Padmavat with Hindi Commentary

मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा

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पृष्ठ 226

। पद्मावत । २२५
पद्मिनि चाहे घाट दुइकरां । और सबै वह गुण निरमराँ ॥
दो० चित्रिनि जैस कुमुदैं रँग, और बासना अंग।
पद्मिनि बास चन्दन जस, भँवर फिरहिं तेहि संग ॥
चौथे कहौं पद्मिनी नारी। पद्म गन्ध शशि दईसवँारी ॥
पद्मिनि जात पद्म रँग ओई। पदम बास मधुकर सँग होई ॥
नासुठ लांबी नासुठ छोटी। नासुठ पातर नासुठ मोटी ॥
सोरहों करन रंग है बनी। सो सुलतान पद्मिनी गुनी ॥
दीर्घ चारु बार लघु सोई। शुभ्र चार चहुँ खीनी होई ॥
औशशि वदन देख सब मोहा। चाल मरालै चलत गत सोहा ॥
खीर अहार न कर सुकवारा। पान फूल कें रहै अधारा ॥
दो० मोह किरन मम बूरन, औ सोरहों शृँगार।
अब यह भांति बरन के, जस बरनै संसार ॥
प्रथमहिं केश दीर्घ शिर सोहैं। औ दीर्घ अँगुरी कर सोहैं ॥
दीर्घ नयन तीख तहँ देखा। दीर्घ ग्रीव कण्ठ त्रयरेखा ॥
पुनि लघु दशनँ होहिं जनु हीरा। औ लघुकुँच उतंग गम्भीरा ॥
लघु ललाटैं दुइज परकासू। औ नाभी लघु चन्दन बासू ॥
नासिकै खीनैं खड्ग की धारा। खीनलंक जनु केहरि हारा ॥
खीन पेट जानहु नहिं आंता। खीन अधरैं बिद्रुमँ रँगराताँ ॥
शुभ्र कपोलैं देख मुख शोभा। शुभ्र नितम्बैं देख मन लोभा ॥
दो० शुभ्र कलाई अति बनी, शुभ्र जंघ गजचौल ।
ज्यादा १ दोहिस्सा २ पाकसाफ ३ कोकावेली ४ कमल ५ चाँद ६-१२
भँवर ७ बड़े ८-१६-१७ छोटे ६-१६ मोटा १० पतला ११ हंस १३ पहिले १४
चाल १५ हाथ १८ दांत २० छाती २१ माथा २२ नाक २३ पतली २४
तलघार २५ पतली कमर २६ चीता २७ होठ २८ मूंगा २६ लाल ३० मोटा
गाल ३१ चूतर ३२ हाथी की चाल ३३ ॥