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पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

Padmavat with Hindi Commentary

मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा

DevanagariAwadhipublished318 पृष्ठ

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पृष्ठ 205

दिवसेहिं भानुँ अलोपभा, वासुँकिइन्द्रसकान ॥
चितोर आय नेर भा राजा । फिरा जियत इन्द्रासनगाजा ॥
बाजन बाजे होय अडोरों । आवहिंवहलहस्तिंत्रौ घोरा ॥
पद्मावत चंडोल जो बैठी । पुनिगईउलटस्वर्गसों दीठीँ ॥
यहि मन ऐंठा रहै न सूधा । बिपतिनसँवरै सम्पतिलुब्धाँ ॥
सहस बरस दुखसहै जो कोई । घड़ी एक सुख बिसरै सोई ॥
योगिन यही जान मन मारा । तेहुँ न यह मन मरै अपारा ॥
रहै न बांधा बर भा जेही । तेलियां मार डार पुनि तेही ॥
दो० मुहम्मदयहियमनअमरै है, कहुकितमाराजाय ।
कहां सदाशिव आवैं, घटते घटत विलाय ॥
कुँवर जो बहिवहि घाटनलागी । बहु बेकरार सोय जनुजागी ॥
विकल अचेत चेत तिनकहा । सङ्ग साथ नहिं दूसर रहा ॥
कहां रहे आये हम कहाँ । जानी नहीं किजायहिकहां ॥
जागहिं दयाँदृष्टि कै आपी । खोलसोनयनदीन्हविधिझांपी ॥
जेहि के सङ्ग पद्मिनी बांची । बहुतअनन्दैं बहुतनृतें नाची ॥
अबमगैं मिले आयजगनाथा । सबै आयकें नावहिं माथा ॥
अतिदुख मिले आयके राजा । सोई ते गये उनकेकाजा ॥
दो० सो हीरामन रतन रवि१७, सो पद्मावत लाल ।
सो पद्मावत सो कुँवर, सो प्रीतम प्रतिपाल ॥
नागमती कहँ अगमेंजनावा । गई तपन वर्षा जनु आवा ॥
रही जो मुइनागिनिजसतुर्चा । जिव पायें तिनकी भइसुचा ॥
दिन १ सूर्य्य २ नामराजासांप ३ शेर ४ हाथी ५ आसमान ६ निगाह ७
दौलत में दीवाना ८ हज़ार ६ संखिया ज़हर १० हमेशा ज़िन्दा ११ मेहरवानी
की निगाह १२ खुश १३ नाच १४ शायद १५ राजा के काम को १६ सूर्य्य १७
आगम १८ चमड़ा १६ ॥