पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)
Padmavat with Hindi Commentary
मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंपद्मावत। २०३
तुरत तुरङ्गम१ दोउ चढ़ाई। जल मानुषअँगवासँगलाई॥
दो० भेंटे समुदिनै तब कियो, फिरे नाय कै माथ।
जलमानुष तबहींफिरे, जबसो आयजगनाथ॥
जगन्नाथ दरशन कहँ आये। भोजन रींधा भात पकाये॥
राजैं पद्मावत सों कहा। साँठ नाँठ कछुगाँठ न रहा॥
साँठै होय जासों सो बोला। नँठै जोपुरुषै पातज्योंडोला॥
साँठें रङ्क चलै मौर्राई। नए रावें सब कहँ बौराई॥
साँठै आव गर्व तन फूला। नँठेहि बोल बुद्धिवलभूला॥
साँटें जागनींद निशि जाई। नए कहै होय औंघाई॥
साँठें दृष्टि ज्योति हो नयना। नठहिये मुखआव न बैनाँ॥
दो० साँठें रहे सिधै न तन, नँठहि आगैरें भूख।
बिनगांठै वृक्ष निपत्तैंज्यों, ठाढ़ ठाढ़ पै सूख॥
पद्मावत बोली सुनु राजा। जीव गये धन कौने काजा॥
रहा द्रव्य तब कीन्ह न गांठी। पुनिकितमिले चलैजोनांठी॥
मुक्ती साँठै गांठ जो करे। सांकरैं परे सोई उपकैरै॥
जेहि तन पंख जाय जहँताका। पैगै पहार होय जो थाका॥
लक्ष्मी रही दीन्ह मोहिं वीरा। भरके रतन पदारथ हीरा॥
काढ़ एक नग बेगें भुजाहू। बहुरे लच्छैं फेर दिन पाऊ॥
द्रव्य भरोस करै जन कोई। सांठ सोई जो गांठी होई॥
दो० जोर कटकै पुनि राजा, घरकहँ कीन्ह पयानै।
-- घोड़ा-१ मुलाकात २ लक्ष्मी ३ दौलत गई ४ दौलत ५- बेदौलत ६-१२
मर्द ७ कमीनामालदार ८ अकड़िके ६ राजा १० गरूर ११ मालदार १३
रात १४ गरीब १५-२० निगाह १६ दिल १७ आवाज़ १८ दिलजंमई १६
बहुत २१ वेरुपया २२ बेपत्ता २३ दौलत जातीरही २४ दौलत होनेके
समय २५ संगी २६ काम आवे २७ क़दम २८ जल्द २६ दौलत ३०
फ़ौज ३१ कूच ३२ ॥