पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)
Padmavat with Hindi Commentary
मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंपद्मावत । १६५
डाढ़ मारके राजा रोवा। कैं चितौरगढ़ राज बिछोवा ॥
कहां मोर सब द्रव्य भंडारू। कहां मोर सब कटककँधारू ॥
कहां तुरंगै मोर बांकावली। कहां मोर हस्ति सिंहली ॥
दो० कहँ रानी पद्मावत, जीव बसे जेहि माहिं।
मोर मोर के खोयों मूल, गर्वऔगाहिं ॥
चम्पा भँवरा गुरु जो मिलावा। मांगे राजा बेगि न पावा ॥
पद्मिनि चाह जहां सुन पाऊँ। परों आग औ पानि धसाऊँ॥
ढूंढ़ों पर्वत मेरु पहारा। चढ़ों स्वर्ग औ परों पतारा ॥
कहां सो गुरु पाऊँ उपदेशी। अगमपन्थ कर होय संदेशी ॥
पर्यो आय यह समुद्र अथाहा। जहां न वार न पार न थाहा ॥
सीता हरण राम संग्रामा। हनुमत मिला जिता तब रामा॥
मोहिंन कोइ विनवौं केंहि रोई। को सहाय उपदेशिक होई ॥
दो० भँवर जो पावै कमल कहँ, मन आनंद बहुतकेल ।
आयपरा कोइ हस्ति तहँ, चूरकिये सो बेल ॥
कासों पुकारौं कापहँ जाऊँ। गाढ़ै मीत होय तेहि ठाऊँ ॥
को यह समुद्र मथे बल बाढ़ा। को मंथ रतन पदारथ काढ़ा ॥
कहां सो ब्रह्मा विष्णु महेषू। कहां सुमेरु कहां वह शेषू ॥
कोचस साज देइ मोहिंआनी। वासुकि दाम सुमेरु मथानी ॥
को दधिसमुद्र मथै जस मथा। करनी सार न कहिये कथा ॥
जौलहि मथन कोइ दै जीवा। सूधी अंगुरि न निकसै घीव ॥
लै नग मोर समुद्र भा बया। गाढ़ परै तौ लै परगटा ॥
पाद-टिप्पणियाँ (Footnotes):
अलग १ फ़ौजभारी २ घोड़ा ३ हाथी ४ गरूरगहिरा ५ जल्द ६ वीहड़ ७
आसमान ८ राह बतानेवाला ९ मुश्किलराह १० मिन्नत ११ दुख १२
हाथी १३ पियारादोस्त १४ जगह १५ महादेवजी १६ पहाड़ १७-२०
नामराजासाँपोंका १८ रस्सी १६ ॥