सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

Padmavat with Hindi Commentary

मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा

DevanagariAwadhipublished318 पृष्ठ

पृष्ठ 192, कुल 318 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 192

को बावर तुम वौरहि देखा । जो बावर मुख लागि सरेखा ॥
बावर तुम जो मूखे कहँआनी । तोहिन सभभी पंथंभुलानी ॥
पंख जो बावर रहि घर माटी । जीभ चढ़ाय भखै सब आँटी ॥
महिरावन की रीर जो परी । कहो सी सेतुबन्ध बुधि हरी ॥
यहि सो आहि महिरावनपूरी । जहँवां स्वर्ग नेर घर दुरी ॥
अब पछताव द्रव्य जस जोरा । करहु स्वर्ग पर हाथ मरोरा ॥
दो० जोहि जियत महिरावन, लेत जगतकर भार ।
जो मरहाड़ न लैगा, अस होय परा पहार ॥
बोहितें भवहिं भवै सब पानी । नाचैं राक्षस आशतुलोनी ॥
बूडहिं हस्ति घोर मानंवाँ । चहुँदिश आयजुरे मँसखंवा ॥
ततखन राजपंख एकआवां । शिखंर टूटजसडहनेडुलावां ॥
परांदृष्टि वह राक्षस खोटा । ताकेसिजैसुहस्तिं बड़मोटा ॥
आय वही राक्षस पर टूटा । भैंहिलेउड़ा भँवरजल छूटा ॥
बोहितें टूक टूक सब भई । ऐसो न जाना वह कहँ गई ॥
भये राजा रानी दुइ पाटा । दोनों बहे चले दुइ बाटाँ ॥
दो० कार्यों जीव मिलायके, मारकियो दुइ खण्ड ।
तन रोवत धरतीचला, जीव चला ब्रह्मण्ड ॥
मूरछ परी पद्मावत रानी । कहँजिव कहँपिव ऐस न जानी ॥
जानु चित्र मूरति गहि लाई । पाटा परी बही तस जाई ॥
जन्मत पवन सही सुकवारा । तेहिसो परादुखसमुद्र अपारा ॥
लक्ष्मी माय समुद्र की बेटी । ताकहँ लच्छ होय जें भेटी ॥
भूख के पास आये १ राह २ चींटी ३ नाव ४ उम्मेद पूरी हुई ५ हाथी
६-१३ आदमी ७ तुरंत ८ सौमुगी ६ पहाड़ १०. बाजू ११ निगाह १२
पकड़ना १४ नाव १५ राह १६ बदन १७ आसमान १८ तसवीर १६
दौलत २० ॥