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सर्वकोश
पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

Padmavat with Hindi Commentary

मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा

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पृष्ठ 19

१८ पद्मावत।
पुनि देखी सिंहलकी बाटो। नवोनिद्धि लक्ष्मी सबहाटोँ ॥
कनकें हाटैं सबकुहकेंहिं लीपी। बैठि महाजन सिंहलद्विपी ॥
रचीहतोड़ाँ रूप न ढारे। चित्र कटावअनेक सँवारे ॥
सोनरूप भल भयो पसारा। धवलैशिरिपोतहिं घरवारा ॥
रतनें पदारथमाणिकैं मोती। हीरालाल सँवारे जोती ॥
औ कपूर बेना कस्तूरी। चन्दन अगर रहा भरिपूरी ॥
जिनयहिहाँटैन लीन्हविसाहाँ। तिनकहँआनहाँट कितलाहाँ॥
दो० कोई करै विसाहना, काहू केर विकाय।
कोई चलै लाभ सों, कोई मूर गँवाय ॥
पुनि सुशृंगार हाँटै भलदेखा। किये शृंगार बैठितहँ वेश्याँ ॥
मुख बीरी शिरचीर कुसुम्भी। काननकनकें जड़ाउखुम्भी ॥
हाथबीन पुनि मृगौँ भुलाहीं। नरमोहहिंसुनिपैगँ न जाहीं॥
भौंहधनुष तेहि नयनैँ अँहेरी। मारहिं बाणसान सों हेरी ॥
अलकैं कपोलैँ होलहँसदेहीं। लाय कटाक्ष मारजनु लेहीं ॥
कुचैँ कंचुकैँ जानहिंजगैं सारे। अंचल दीन्ह सुभावहि टारे ॥
केते खेलार हार तेहि पांसा। हाथ झारि उठिचले निरासा ॥
दो० चेटक लाय हरहिं मन, जबलहिहैं गाँठिफेट।
सांटै नाट पुनि भई बटराऊँ, ना पहिचान न भेट॥
लैके फूल बैठि फुलहारी । प्रान अपूरव घरे सँवारी ॥
राह १ दुनियाकी दौलत २ बाजार ३-५-१५-१७-२१ सोना ४-२३
केसर ६ दसनी ७ मुसव्वरी ८ बहुत ९ आरास्ता १० चूना ११ जवा-
हिर १२ मूंगा १३ मुश्क १४ मोललेना १६ फ़ायदा १८-२० खरीदारी १६
तवायफ़ २२ बाल २४ हिरण २५ कदम २६ आंख २७ शिकारी २८ देखना २६
बाल ३० गाल ३१ छाती ३२ अँगिया ३३ संसार ३४'जादू ३५ मुफ़लिस ३६
मुसाफिर ३७ माली ३८ ॥