पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)
Padmavat with Hindi Commentary
मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंपद्मावत। १७
फरीतूत कमरख औ ब्योजौँ । राय करौंदा बेर चिरौंजी ॥
सुगन्धराव छुहारा दीठे १। और खजहजाँ २ खाटे मीठे ॥
दो० पानि देहिं खण्डवॉनी ३, कुवहिं खांड़ नहिं भेल ।
लागी घरी रँहँटकी, सींचहिं अमृत बेल ॥
पुनि फुलवारि लाग चहुँपासा । बृक्षे ४ बेदहिचन्दन झइबासा ॥
बहुत फूल फूली घन बेली । क्यौँड़ा चम्पा गोंद ६ चमेली ॥
सुरंग गुलाल क़दम औ गूजा । सुगंध बकोरी गन्धब पूजा ॥
जाहीजूही बर्गचन लावा । पहुपं ५ सुदरसन लागसुहावा ॥
नागेसर सदबँर्ग ७ हवारी । औ शिंगारहार फुलवारी ॥
सुमन जर्द बहु खिली सेवती । रूपमंजरी और मालती ॥
मोलसिरी बेली औ करना । सबै फूल फूले बहु बरना ॥
दो० तेहि शिर फूल चढ़हिं वै, जेहि माथे मन भाग ।
आह्नेह सदा सुगन्धबहै, जनु बसंत औ फाग ॥
सिंहलनगर दीख पुनि बसा । धनिराजा अस जाकर दसा ॥
ऊँची पँवरी ८ ऊँच उड़ासाँ ९ । जनु कैलास इन्द्रकर बासा ॥
राउ रंक सब घर घर सुखी । जो देखे सो हँसता मुखी ॥
रचि रचि साजे चन्दन चूरा । मोती अगरे १० मैद करपूरा ॥
सब चौपारहिं चन्दन खँभा । तहिं राजा तब बैठो सभा ॥
जनु सभा देवतहिं की जुरी । परी दृष्टि ११ इन्द्रासन पूरी ॥
सबै गुणी औ पण्डित ज्ञाता । संस्कृते १२ सबके मुख राताँ १३॥
दो० अलखहिं १४ पन्थ सँवारैं, जनु शिवलोक अनूपं १५ ।
घरघरनारिपद्मिनीमोहहिं, सबअपसरनैं १६ केरुप १७॥
नाम मेवा १ देखना २ खजूर ३ माली ४ पेड़ ५ फूल ६ गेंदा ७
रंगबरंग ८ जीना ९ महल १० केसर ११ निगाह १२ संस्कृत जबानके सब
बोलनेवाले १३ लाल १४ ईश्वरकोराह १५ बेमिसाल १६ स्वर्गकी औरतें १७ ॥