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पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

Padmavat with Hindi Commentary

मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा

DevanagariAwadhipublished318 पृष्ठ

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पृष्ठ 166

पद्मावत । १६५
जूझैं दुहूँ यौबनें १ सों लागा । बिचहुतसीवैं जीव लै भागा ॥
दुइ घट मिल एकै है जाहीं । ऐसि मिलहिं तबहीं न अघाहिं ॥
दो० हंसा केल करहिं ज्यों, सरवर्रै, कँदनैहि दोउ ।
सेव पुकारे पारभा, जस चकवीक बिछोउ ॥
ऋतुहेमन्त सँग पियो पियाला । मानहुँ फागुन सुखसेवसाला ॥
सूर संपेती महँ दिन राती । दगल चीर पहिरहिं बहुभांती ॥
घरघर सिंहल है सुख भोजू । रहा न कंतहूँ दुखकर खोजू ॥
जहँ धनपुरुष शीतनहिंलागा । जानहुँ काग देख सर भागा॥
जाय इन्द्र सों कीन्ह पुकारा । हों पद्मावत देश निसारा ॥
यहि ऋतु सदा संग मैं सोवा । अब दरशनतें भरा बिछोवाँ ॥
अब हँसके शशि सूरहँ भेटा । अहाजो शीत बीचहुत मेटा ॥
दो० भयो इन्द्रकर आयसुं, पैरैसे हावहिं झइसोय ।
काहु काहुकी पीरभा, कोहि काहु की होय ॥
नागमती चितौर पँथहेरैं । पिययोगी पुनि कीन्हन फेरा॥
नागर नारि काहु बस परा । तैं बिमोहें मोसों चित हरा ॥
सुवा कालै होय लैगा पीव । पीव न जात जातपर जीव ॥
भयो नारायण बावन किरा । राज करत नलराजा छरा ॥
करणैं बान लीन्हों कै छंदू । भर्रथींहिं भयो झिलमिलीं नन्दू ॥
मानत भोग गोपिचँदैं भोगी । लैअपसेंवां जलंधर योगी ॥
लैकेकंथं भाकुररैं लोपी । कठिनबिछोह जियहिकिमिगोपी ॥
दो० सारस जोरी किमिहरी, मारगयो किन खांग ।


लड़ाई १ जवानी २ जाड़ा ३ तालाब ४ सुख से कलोल ५ तोशक लि-
हाफ़ ६ अलग ७ चाँद ८ सूर्य ६ हुकुम १० तसवीर ११ राह देखना १२
मोह लेना १३ मौत १४ नाम राजा १५ नाम योगी १६-१८ दुख पाया १७
छिपना १६ खाविन्द २० कौआ २१ ॥