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सर्वकोश
पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

Padmavat with Hindi Commentary

मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा

DevanagariAwadhipublished318 पृष्ठ

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पद्मावत । १५६
तड़क तड़क गौ चन्दन चोला । धड़क धड़क डर उठै न बोला ॥
अहे जो कली कमल रस पूरी । चूर चूर होय गई सो चूरी ॥
देखो जाय जैसी कुँभलानी । सुनि सुहाग रानी बेहँसानी ॥
ले सँग सबही पद्मिन नारी । आई जहाँ पद्मावत बारी ॥
आय रूप सबही जो देखा । सोन बरन होयरही सो रेखा ॥
दो० कुसुम फूल जस मखी, निरँगै देख सब अंग।
चम्पावत भइ वारी, चूँब केश औ मंग ॥
सब रनवास बैठि चहुँ पासा । शशिमंडल जनु बैठ अकासा ॥
बोली सबहिं वारि कुँभलानी । करहु शिंगार देहु खड़वानी ॥
कमल कली कोमल रंगभीनी । अतिसुकुमार लङ्क की छीनी ॥
चांद जैसी धन बैठि गिरासी । सहस किरन होय सूर्य विकासी ॥
तेहिके भारै गहन अस गही । भइ निरंग मुखज्योति न रही ॥
दर्ब वार कुछ पुण्य करेहू । औ लै बर्र संन्यासहि देहू ॥
भरके थार नखत गजमोती । वरंती कीन्ह चांदकी ज्योती ॥
दो० कीन्ह अरगजा मखना, औ सुख दीन्ह नहान ।
पुनि भइ चांद जो चौदस, रूप गयो द्विप भान ॥
पटवैहि घेर आन सब छोरी । सारी कंचुकै पहिर पैंतोरी ॥
पहँदयीं और कैस्यौं रौती । बायरलै पिंडवाँही गुजराती ॥
चकवों चीर मखोनौ लीने । मोति लाग औ छापे सोने ॥
सुरंग चीर भल सिंहलदीपी । कीन्ह जो छापा धनवहछीपी ॥
पेमचौं डुरयाँ और बुँदेरी । श्यामँ सेतें पीरी औ हेरी ॥
हँसना १ पीली २ चेरंग ३-८ चाँद ४ शरबत ५ कमर पतली ६ किसके
मुलाकात के लूकसे ७ दरवाज़ा ६ न्योछावर १० खुशबूदार उबटन
११ सूर्य १२ दारोगा तोशाखाना १३ अँगिया १४ रेशम १५ नाम कपड़ा १६-
१७-१८-२०-२१-२२-२४-२५-२६ लाल १८ खूबसूरत २३ काला २४ सफ़ेद २५॥