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पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

Padmavat with Hindi Commentary

मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा

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पृष्ठ 156

॥ पद्मावत ॥ १५५
टूटी अंग अंग सब मेशा। छूटी मांग अंग भये केशा ॥
कंचुक चूर चूर भइ तानी। टूटि हार मोती झहरानी ॥
बारँ तांइ सलोनी टूटी। बांहू कँगन कलाई फूटी ॥
चन्दन अंग छूट तस मेटी। बेसर टूटि तिलक गा मेटी ॥
दो० पुहुप शिंगार सँवार सब यौवन नवल बसन्त ।
अरगजै ज्यौ हिय लायके मरगज कीन्हों कन्त ॥
विनय करै पद्मावत बाला । सुथनै सुराही पियो पियाला ॥
पिय आयसु माथे पर लेऊँ। जो मांगै नय नय शिर देऊँ ॥
पै पिय बचन एक सुनि मोरा । चाखो पिय मधु थोरा थोरा ॥
प्रेम सुरा सोई पै पिया। लखैन कोऊ कि काहूँ दिया ॥
चुवा दाखै मधु जो इकबारा। दूसर वार लेत बेसँभारा ॥
एक वार जो पीके रहा। सुखजीवन सुख भोजनलहा ॥
पान फूल रस रंग करीजै। अधरै अधरसौं चाखाकीजै ॥
दो० जो तुम चाहो सो करो ना जानों भल मन्द ।
जो भावै सो होय मोहिं, तुम पिय चहूँ अनन्द ॥
सुनि धने प्रेम सुराके पिये । मरेना जिवन डरा हिन हिं हिये ॥
जहँ मधु तहां कहां निस्तारा। की सुधुमरहां की मतवारा ॥
सो पीजानि पिये जो कोई। पै न अघाय जाय पर सोई ॥
जाकहँ होय वार इकलाहाँ। रहै न वह बिन ओही चाहा ॥
गर्व दर्व सब देइ बहाई । कै सब जाव न जाय पियाई ॥
रातहि दिवस रहै सब भीजा। लाभै न देख न देखी छीजाँ ॥
अंगिया १ नाम जेवर २ राजाके मुलाक़ातसे ३ फूल ४ खुशबू ५
दलमल ६ शराब मुहब्बत सुराही से कम कम पियो ७ हुक्म ८ बात ६
शराब १० अंगूर ११ होंठ १२ पद्मावत १३ दिल १४ फ़ायदा १५-१७
दिन १६ नुक़सान १८॥