पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)
Padmavat with Hindi Commentary
मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंपद्मावत। १५३
विहँसी¹ धन सुनके सतभाऊ। हों रामा तू रावण राऊ ॥
रहि जो भँवर कमलकी आसा। कस न भोग मानै रसबासा॥
जस सत कहा कुँवर तू मोही। तस मन मोर लाग पुनि तोही॥
जबहुत कहिगा पंख सँदेशी। सुन्यों कि आवाहै परदेशी ॥
तबहुत तुम बिन रहै न जीउ। चातुकै² भयों कहत पिउपीउ ॥
भयों चकोर सो पन्थे³ तिहारे। समुद्रसीप जस नयन पसारे ॥
विरह भयों देंहि⁴ कोयलकारी। डार डार जिमि पीउ पुकारी॥
दो० कौनसोदिनजबपिउमिलै, बहुमन रातौ जासु ।
वह दुख देखे मोर सब, हौं दुख देखों तासु ॥
कहि सतभाव भई कँठलागू। जनु कंचन⁵ औ मिला सुहागू॥
चौरासी आसन पर योगी। षटरस बन्दक चतुर सो भोगी॥
कुसुमँमाल⁶ अस मालति पाई। जनु चम्पा गँहि डार नवाई ॥
कलीवेध⁸ जनु भँवर लुभाना। हनों राहु अर्जुन के वाना ॥
कंचने॑ कली जड़ी नगज्योती। वरमा सों बेधा जनु मोती ॥
नाँग॑¹ जानि कीरे॑² नख दिये। अधरै॑³ आम्बरस जानहु लिये॥
कौतुककेल करहिं दुख नसा। कन्दैहिं कुरलहि जनुसैरैं हँसा॥
दो० रही वसाय वासना, चोवा चन्दन मेदे॑⁶। ३१६
जो अस पद्मिन रँवी, सो जानै यह भेद ॥
रतनसेन सो कन्त सुजानू। षटरस पण्डित सोरह बानू ॥
तस द्वै मिले पुरुष औ गोरी। जैसी विछुड़ी सारस जोरी ॥
१ हँसी १ पपीहा २ राह ३ जलना ४ दीवाना ५ सोना ६ कुसुमकी जोड़ी
की तरह छाती ७ पकड़ना ८ कली में भँवरा ने सूराख किया ६ तीर
निशाने पर मारा १० सोने की कलीसा बदन मोती की तरह वरमा
से बेधा ११ तोता १२ होठ १३ कुल्लेल १४ तालाब १५ अतर १६
भोगना १७॥