पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)
Padmavat with Hindi Commentary
मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंपद्मावत। १३
जम्बू दीप कहूँ तस नाईं। लङ्कदीप संरपोच न भाई ॥
दीपगुस सहल आरण परा। दीपमहो सिंहल बाँस हरा ॥
॥ दो० ॥ सत्र संसार औ पृथिवी, आये सातो दीप।
एक दीप नहिं आतिम, सिंहल दीप समीप॥
गन्धर्वसेन सुगन्ध नरेशू। सो राजा वह ताकर देशू ॥
लंका सुना जो रावण राजू। तेहु जाहि बर ताकर साजू ॥
छप्पन कोटकटकै दलसाजा। सबै छत्रपति औ गढ़राजा ॥
सोरह सहसै घोड़ घुड़शारों। श्यार्मकरणजसत्रांक तुपारा ॥
सात सहसै हस्ती सिंहली। ईम कैलासं ऐरापति बली ॥
अश्वपतिक शिर मौर कहावे। गजपतीकै अँकुशगर्जै नावे॥
नरपतीकै कहुँ और नरिन्दू। भूपतीक जगे दूसरइन्दू ॥
दो० ऐसो चकैवे राजा, चेहूँखण्ड भू होय ।
सबै आय शिरनावहीं, सरबर करी न कोय ॥
जोहि दीप नेरे भा जाय। जनु कैलास तीर भा आय ॥
गहन अंबरोंउ लागचहुँपासा। उठी भूमि हतिलागि प्रकासा॥
तरखेरै सबै मलयँगिरि लाये। भइजगछाहिं र्यनि है आये ॥
मिली सुमेर सुहाई छोहां। जेठ जाड़लागै तेहि माहां ॥
वही छाहिं र्यनि है आवै। हरियर सबै प्रकास देखावै ॥
पन्थकै जो पहुँचे सहि घामू। दुख बिसरे सुखहोय विश्रामू ॥
जिन्ह वह पाई छाहिं अनूपों। फिरि न आय सही यहिधूप॥
बराबर १ राजा २ फौज ३ हजार ४-७ अस्तवल ५ घोड़े की जात ६
हाथी ८ बराबर ६ नाम पहाड़ १० नाम हाथी राजा इन्द्र ११ घोड़े
सवार १२ हाथी सवार १३ हाथी १४ राजा १५-१६-१७ दुनिया १८
राजा इन्द्र १६ चक्रवर्त्ती २० तमाम दुनिया २१ बराबर २२ नाम पहाड़ २३
गुंजान २४ बाग २५ ज़मीन २६ पेड़ २७ चन्दन २८ रात्रि २६-३१
पहाड़ ३० मुसाफ़िर ३२ आराम ३३ बेमिसाल ३४ ॥