पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)
Padmavat with Hindi Commentary
मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१२ पद्मावत ।
हौं पण्डितन केर पछलगाँ । कछुकहि चलाँ तबलडीडेगा ॥
हियँ भंडारंग अहे जो पूँजी । खोली जीभ तारकी कूँजी ॥
रतनैं पदारथ बोलें बोला । सुरसैं प्रेममधुँ भरी अमोला ॥
जेहिकी बोल बिरहकी घाया । कहँतेहि भूख कहां तेहिमाया ॥
फेरै भेर्व रहै भा तपाँ । धूर लपेटा मानिकैं छुपा ॥
दो० मुहम्मद कबिजो प्रेमकी, नातन रक्त न मांस ।
जैं मुखदेखा सो हँसा, सुनि तेहि आये आंस ॥
सैंनैं नवसै सत्ताइस अहै । कथा अरम्भैं वेनकवि कहै ॥
सिंहल दीप पद्मिनी रानी । रतनसेन चित्तौरगढ़ आनी ॥
अलाउद्दीन देहली सुल्तानू । राघव चेतन कीन्ह बखानू ॥
सुना शाह गेंढै छेंका आई । हिन्दू तुरकहि भई लड़ाई ॥
आँदिअन्त जस कथा अहै । लिखि भाषा चौपाई कहै ॥
कबि ब्यास रस कँवला पुरी । दूरहिं नेरे नेरे दूरी ॥
नेरे दूर फल जस कांटा । दूर जो नेरे जस गुड़ चांटों ॥
दो० भँवर आय वनखण्डँ सो, लेइ कमलकी वास ।
दादुरैं वास न पावै, फूलहिजो आछी पास ॥
सिंहल दीप कथा अब गाऊँ । औ सुपद्मिनी बैंरणि सुनाऊँ ॥
निरमर्ले दरपणँ भांतिबिशेखा । जिन्ह जसरूप सोतैसो देखा ॥
धनिसोद्वीप जिन्ह दीपक बारे। औ सुपद्मिनी जोड़ई २१ सँवारे॥
सात दीप बैंरैणे सब लोगू । एकौ द्वीप न वहिसँर योगू ॥
दया दीन नहिंतस उजियारा । सरनद्वीप सर होय न पारा ॥
ढोलबजायके १ दिल २ ज़वांहिर ३ मीठे मुहब्बतके भरेहुये ४ शराब ५ सूरत बदले
हुये ६ तप करनेवाले ७ मोती वगैरह ८ खून ६ शुरूकरना १० नाम भाट ११ बयान
करना १२ क़िला १३ अव्वल से आखिर तक १४ चींटी १५ जंगल १६ मेंढ़क १७
तारीफ़ करना १८ साफ़ १६ शीशा की तरह २० ईश्वर २१ बयान २२ बराबर २३॥