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पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

Padmavat with Hindi Commentary

मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा

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पृष्ठ 137

९३६ पद्मावत ।
दो० आज इन्द्रहोय आयोँ, मैं बरात कैलाश १
आज मिली मोहिं अप्सरा, पूजी मन की आश ॥
होय लाग ज्योनार पसारा। कनक पत्र परसे पनवारा ॥
सोन थार मणि माणिक जरे। राये रङ्क सब आगे धरे ॥
रतन जड़ाऊ खोरौखोरी। जन जन आगे सौ सौ जोरी ॥
गडुवन हीरे पदारथ लागे। देख विमोहे पुरुष सभागे ॥
जानहुँ नखत करहिं उजियारा। छिप गये दीपक औ मसयारा ॥
भइमिल चाँद सूर्य की कला। भा उदोत तैसी निरमला ॥
जेहिं मानुष कहँ ज्योति न होती। तेहि भइ ज्योति देख वह ज्योती ॥
दो० पांति पांति सब बैठी, भांति भांति ज्योनार ।
कनक पत्र दोने तरे, कनक पत्र पनवार ॥
पहिले भात परोसे आना। जनहुँ सुवास कपूर बसाना ॥
बालहिं माड़ा औ घी पोई। उजियर देख पाप गयो धोई ॥
लुचई पूरी सुहारी पूरी। एक तो ताती औ सुठ कँवरी ॥
खंडरा खांड़ जो खण्डे खण्डे। बरी अकोतर सो कहँ हण्डे ॥
पुनि सँधाने आने बहु सांधी। दूध दही कि सुरन्दों बांधी ॥
पुनि बांवन प्रकार जो आये। नहिं अस देख न कबहूँ खाये ॥
पुनि जाँवरे पीफावरे आई। घृत खांड़ का कहौं मिठाई ॥
दो० जेवँत अधिक सुवासिक, मुहँ महँ परत विलाय ।
सहसै स्वाद सो पावै, एक कौर जो खाय ॥
जेवन आवा बीन न बाजा। बिनु बाजहिं नहिं जेवैं राजा॥
इन्द्रपुरी १ सोना २-८ राजाको भाई ३ कटोरा कटोरी ४ रोशनी ५
साफ़ ६ रौनक़ ७ बारीक माड़ी ६ एक क़िस्म का खाना १० अचार बहुत
तरह का ११ लड्डुवा १२ खीर १३ मुरब्बा १४ हज़ार १५ ॥