पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)
Padmavat with Hindi Commentary
मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंपद्मावत । १३३
दो० हाट बाट सब सिंहल, जहाँ देखी तहँ राते ।
धन रानी पद्मावत, जाकर ऐसि बरात ॥
रतनसेन कहँ कपड़ा आये । हीरा मोति पँदारथ लाये ॥
कुँवर सहसँ संग अहे सभागे । बिनयै करैं राजा पहँ लागे ॥
जेहिलग तुम साधा तप योगू । लेहु राज मानो सुख भोगू ॥
मज्जनें करहु बिभूति उतारो । करो अस्नानचित्रे समसारो ॥
काढ़हु मुन्द्रा फटक अभाऊ । पहिरो कुण्डल कनकॅजड़ाऊ ॥
छोरहु जटा फुलायल लेहू । झारहु केश मुकुट शिरदेहू ॥
काढ़हु कंथौ चिरकुट लावा । पहिरो राता दगला सुहावा ॥
दो० पांवरि तजहु देहुपगपैरी, आवा बांक तुखारं ।
बांध मौर धरि छत्र शिर, वेगेँ होहु असवार ॥
साजा राजा बाजन बाजे । मदनसहाय दोउदल गाजे ॥
औ राँता सोने रथ साजा । भई बरात गोहेन सब राजा ॥
बाजत गाजत भा असवारा । सब सिंहलने कीन्ह जुहारों ॥
चहुँदिशियश अलखततँरोई । सूरज चढ़ा चांद की ताई ॥
सब दिन तपे जैस हिये माहां । तैसि रात पाई सुख छाहां ॥
ऊपर छत्र राति तस छावा । इन्द्रलोक सब सेवा आवा ॥
आज इन्द्रअप्सर सौं मिला । सब कैलास होहिं सिंहला ॥
दो० धरती स्वर्ग चहुँ दिश, पूररही मशयार ।
बाजत आवै मंदिर कहँ, होहिं मंगलाचार ॥
पद्मावत धौराहरँ चढ़ी । धौकसरवि जाकहँशशि करी॥
लाल १-१२-१७ हज़ार २ अर्ज़ ३ नहाना ४ तसवीर ५ वाली नाचीज़ ६
सोना ७ गुदड़ी ८ खड़ाऊं ९ घोड़ा १० जल्द ११ साथ १३ सलाम १४:
छोटे सितारे १५ दिल १६ इन्द्रलोक की परी १७ आसमान १८ महल २०
सूर्य २१ चांद २२ ॥