पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)
Padmavat with Hindi Commentary
मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंहस्तनेस्तै १ वह करतन बारौँ २। परबत करै पांव की छारौँ ३॥
जोरगिरे ४ गढ़ जानवन्तैं ५ भये । जो गढ़ गर्ब करहिं तें नये ६॥
अन्तैं जो चलना कोउ न चीन्हा। जो आवा सो आपन कीन्हा॥
दो० योगिहि कोह न चाही, तब न मोहिं रिस लाग ।
योग तन्त ज्यों पानी, काहि करै तेहि आग ॥
बसीठहिं जायकही सबबाता। राजा सुनत कोह भा राता १०॥
ठांवहिं १२ ठांव कुँवर सर्वभीखे १३। के अबलहिं ये योगी राखे ॥
अवहूँ वेगहि १४ करो संयाऊँ १५। तस मारहु हत्या किन होऊ १६॥
मन्त्रिनैं कहा रहो मनबूझे । प्रति १७ न होय योगिहिसों जूझे १८॥
वे मारे तो काह भिखारी। लजि होय जो मानी हारी ॥
ना भल मुये १९ न मारे मोखूँ २०। दुहूँवात तुम्ह लागहि दोखूँ ॥
रहे देहु जो गढ़तरैं २१ मेली। योगी कितैं २२ आये पुनि खेली ॥
दो० आयेदेहुँ जो गढ़तरे, जनि चालहु यह बात।
नितहिं २४ जो पाहन २५ भखकरहिं, असकेहिकेमुखदांत ॥
गये बसीठैं पुनि बहुरि न आये। राजैं कहा बहुत दिन लाये ॥
नाजनौं स्वर्ग २६ बात धौं काहा। काहुन आयकही फिर चाहाँ २८॥
पंख न कार्यों २९ पवनैं ३० न पाया। केहिविधिमिलों होउँकेहिधाया॥
सँवर रक्त नयनहि भर चुवा । रोय हँकारेस ३१ माँभी ३२ सुवा ३३॥
परी जो आंसु रक्त ३४ की टूटी। रंग चली जस बीरबहूटी ॥
टिप्पणी/शब्दार्थ:
१ नाश २ ढेर २ राख ३ पहाड़ ४ जहां तक ५ गुरूर ६ मरना ७ खुद-
बीनी की ८ गुस्सा ९ वकील १०-२७ लाल ११ जगह १२ भुलाया १३
जल्द १४ तदबीर १५ सलाहकार १६ बड़ाई १७ लड़ाई १८ मरना १९
नजात २० पाप २१ क़िलेके नीचे २२ कितने आये और चले गये २३
रहने दो २४ हर रोज़ २५ पत्थर २६ आसमान तथा क़िला २८
खबर २९ बदन ३० हवा अर्थात् ज़ोर ३१ बुलाया ३२ दरमियानी ३३
तोता ३४ खून ३५॥