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सर्वकोश
पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

Padmavat with Hindi Commentary

मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा

DevanagariAwadhipublished318 पृष्ठ

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पृष्ठ 101

१०० पद्मावत ।
तेहि निराश प्रीतम कहँ, जिवनदेउँ का देउँ॥
गौरी हँसि महेशों सों कहा। निश्चयहि बिरहानलैं दहा ॥
निश्चै यहि वह कारनें तपा। प्रवलै प्रेम न आछे छिपा ॥
निश्चै प्रेम पीर यहि जागा। कसैं कसौटी कंचनं लागा ॥
बदनपिंयर जलटपकै नयना। प्रकटै दोउ प्रेमके बयना ॥
यहिं वह जन्म लागके सीखा। चही न औरहि ओही रीझा॥
महादेव देवन के पिता। तुम्हरे शरण राम रणजिता ॥
येहूँ कहँ तस मया करेहू। पूरवहु आश कि हत्या लेहू ॥
दो० हत्या चढ़ायहिं कांधदुइ, औ तिनके अपराध ।
तिसरेलेहु कि माथे, जोरलिये कियें साध ॥
सुनि के महादेव की भाखों। सिद्धैंपुरुष राजैं मनलाखा ॥
सिद्धहि अङ्गें न बैठे माखी। सिद्धिपलकनहिलावहिंआंखी ॥
सिद्धिहि अङ्गहोय नहिं छाया। सिद्धहोय नहिं भूखनमार्थों॥
जो जगैं सिद्धि गुसाईंकीन्हा। प्रकंटैं गुप्तं रहै कोचीन्हा ॥
बैल चढ़ा कुष्ठी कर भेषूँ। कहिराजासत आहिमहेशू ॥
चीन्हेसोइ रहै तेहि खोजा। जसंबिक्रमं औ राजाभोजा॥
केजिवंतन्तै मन्तै सों हेरा। गयोहिराय जो वह भा मेरा॥
दो० बिनगुरु पन्थै न पावै, भूलासोइ जो मेट ।
योगीसिद्धहोय तब, जब गोरखै सों भेट ॥
ततखनै रतनसेन घाबरा। छांड़ि डफार पांय लैपरा ॥

महादेवजी १-१८ बिरहकी आग २ जलना ३ संबध ४ ज़बरदस्त ५
सोना ६ ज़ाहिर ७-१५ आवाज़ ८ मेहरबानी ६ बातचीत १०
मर्देकामिल ११ बदन १२ दुनियां दौलत १३ दुनियां १४ छिपा हुआ १६
सूरत १७ राजाबिक्रमाजीत १६ तलाश २० देखना व ढूंढ़ना २१ राह २२
नाम योगी २३ यकायक २४ ॥