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सर्वकोश
पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

Padmavat with Hindi Commentary

मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा

DevanagariAwadhipublished318 पृष्ठ

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पृष्ठ 100

ते यह जिव डांढे परदाधा । आधा निकसरहाघट आधा ॥
जो अधिजरसों विलँबन लावा । करत बिलम्ब बहुत दुख पावा ॥
दो० एतना बोल कहत मुख, उठी बिरहकी आग ।
जो महेश नहिं अमी बुझावत, सकल जगत हुत लाग ॥
पार्वती मन उपजा चाऊँ । देखो कुँवरकेर सत भाऊ ॥
वहिं यह बीच किंप्रेमहि पूजा । तन मन एक कि मारगँ दूजा ॥
भईस्वरूप जानहु अप्सराँ । विहँसि कुँवरकर आँचर धरा ॥
सुनो कुँवर मोसों एक बाता । जस रंगमोर न दूसर राताँ ॥
औ विधि रूपदीन्ह है तोका । उठा सुशबदै जाय शिवलोका ॥
तबहों तोकहँ इन्द्रपठाई । की पद्मिन तुइँ अप्सरै पाई ॥
अब तजि जरन भरन तप योगू । मोसो मानि जन्म भर भोगू ॥
दो० हौं अप्सरै कैलासकी, जेहिसँ पूजनकोय ।
गो तजि सँवरजोवह मरिस, कौन लाभ तेहि होय ॥
भलहिं रंगतुहि अप्सर राताँ । मोहिं दुसर सो भावन बाता ॥
मोहिं वह सँवरि मुयेअसलहौं । नयनैं जो देखिसिपूँछसि कहा ॥
अबहिंताह जिवदिये न पावा । तेहिअस अप्सर ठाढ़ मनावा ॥
जो जिवदेहों वहकी आशा । नजनौं काह होय कैलाशा ॥
हौं कैलास काहि लै करों । सो कैलास लाग जेहिमरों ॥
वहकी बारै जीय निसवारों । शिर उतार न्योछावर डारों ॥
ताकर छाँहै कहै जो आई । दोउ जगतँ तेहिदेउँ बड़ाई ॥
दो० वह न मोर कछुआशा, हों वह आश करेउँ ।
जलाना १ महादेवजी २ अमृत ३ सब ४ पैदा होना ५ चाहना ६
राह ७ इन्द्रलोककी परी ८-१८-१६ हँसना ६ लाल १० ईश्वर ११
आवाज़ १२ इन्द्रतक भेजोंगी १३ छोड़ना १५-१८ बराबर १७ फ़ायदा १६-२१
लाल २० आंख २२ दरवाज़ा २३ न्योछावर २४ ख़बर २५ जहान २६ ॥