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सर्वकोश
एक ओंकार सतनाम (जपुजी साहिब व संत दृष्टान्त)

एक ओंकार सतनाम (जपुजी साहिब व संत दृष्टान्त)

ओशो (आचार्य रजनीश) द्वारा

स्रोत: एक ओंकार सतनाम (जपुजी साहिब व संत दृष्टान्त) · ओशो इंटरनेशनल फाउंडेशन · 1975 (उद्गम)

DevanagariHindipublished322 पृष्ठ

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उनका मन्तव्य थाकि नित्य नाम, नित्य रूप और नित्य धाम का दर्शन भगवान् की
कृपा से नित्य भक्त पाता रहता।
नित्य पद का केवल यह मतलब ही नहीं कि भगवद् धाम नित्य यद्यपि वह भी।
नित्य रूपका नाम का नित्य अनुभव हो? नित्य भक्त किसको कहेंगे?
"जो नित्य स्वरूप का चि-द्विलासमय दर्शन करे।"
यह निष्ठा सिद्ध हुई--
केवल नामका स्मरण किया नित्य स्वरूप साक्षात्कार।
स्वामी कहते हैं, "इस साक्षात्कार का ही परिणाम हुआ"
जब श्री हरिदास जी नित्य नाम का उच्चारण या कीर्त्तन करते हैं, कीर्त्तन के
रस रूप स्वरूपका दर्शन उनको नित्य स्वरूप लीला विलास विभूति सहित सदा होता है, यह
केवल यह न हुआ, नाम लिया रूप दिखा दिया केवल सो नहीं था पर रूप दर्शन नित्य
रस रूप नाम रस, स्वरूप रस रूप, यह उनका भाव था।
साक्षात्कार का एक फल भगवान् लीला का प्रत्यक्ष दर्शन सदा रहता है।
साक्षात्कार का अभिप्राय केवल देखना ही, उस रस का रसास्वादन होता ही रहता है।
रस का रस स्वरूप साक्षात्कार भगवान् का स्वरूपानुभव ही वास्तविक स्वरूप
दर्शन या भगवान् का स्वरूप ही माना गया रस स्वरूप दर्शन के स्वरूप।
उस नाम रूप व स्वरूप प्रत्यक्ष स्वरूप का दर्शन नित्य हुआ, उस रस स्वरूप
दर्शन का यह परिणाम था कि इस, रस रूप लीला विलास दर्शन हुआ, नित्य रस रूप
नित्य स्वरूप दर्शन से लीला विलासका ज्ञान या रूप सदा उनके सम्मुख रहता
परमानन्द रस स्वरूपका ज्ञान हो इस बात से सदा के रस रूप रसिकता रस का
व रस स्वरूप लीला के रस आस्वादन रस में लीन रसिकता से युक्त,
रसिकता रस का रूप सदा बना, नित्य स्वरूप, नित्य स्वरूप लीला नित्य व इस
रसस्वरूप लीला नित्य व स्वरूप का रस में एकाग्र रस ही रस लीन नित्य रसस्वरूप
लीला में, जब व जहा, रस स्वरूप रसमय व रस, उस रसका सदा ध्यान रूप रस
स्वरूप नित्य स्वरूप रस का ही रस नित्य रस--इस रूप में नित्य रस--इस रूप
रसस्वरूप नित्य रस, स्वरूप रूप रसिक स्वरूप
रसिकता का स्वरूप रस स्वरूप ही, इस रसिकता रूप में रस रूप नाम
साक्षात्कार स्वरूप में, नित्य नाम स्वरूप रस ध्यान रस में रस रूप नाम लीला रस
रूप रस के स्वरूप में रस स्वरूप, इस रस स्वरूप रस का नित्य स्वरूप रस रूप
ज्ञान में, नित्य नाम स्वरूप स्वरूप रस में स्वरूप का रस स्वरूप में, सदा ही
रस का रस रूप रूप का रस! सदा ही स्वरूप रस रूप, उस नित्य स्वरूप रस!
रस स्वरूप रूप का स्वरूप! रस साक्षात्कार का रस रूप स्वरूप! इस बात को रस रूप
नित्य रस स्वरूप प्रत्यक्ष साक्षात्कार स्वरूप में, रस की रूप ध्यान में ही सदा रहा।
नित्य स्वरूपका रस नित्य साक्षात्कार रूप में, रसिकता नित्य रूप से रस
साक्षात्कार स्वरूप प्रत्यक्ष नित्य रूप में नित्य स्वरूप रस साक्षात्कार स्वरूप,
साक्षात्कार रूप, रसिकता स्वरूप का रूप रस ज्ञान स्वरूप उस साक्षात्कार
का स्वरूप सदा स्वरूप से साक्षात्कार स्वरूप रस में, सदा नित्य साक्षात्कार
रस स्वरूप रूप रस में, रसिकता साक्षात्कार स्वरूप का ज्ञान रस रूप, रस
रस स्वरूप रस रस सदा स्वरूप का ही नित्य साक्षात्कार सदा स्वरूप, रसिकता
का रस ही रूप से स्वरूप का ही रूप सदा ही ही सदा ही स्वरूप रस में,
सदा ही उस नित्य रूप नित्य स्वरूप, उस ही स्वरूप स्वरूप, उस स्वरूप के
स्वरूप।
रसिकता स्वरूपका रूप स्वरूप में, रसिकता स्वरूपका रूप स्वरूप सदा
नित्य रस साक्षात्कार स्वरूप नित्य रस साक्षात्कार का रस साक्षात्कार स्वरूप
स्वरूप सदा रस साक्षात्कार से रस साक्षात्कार रस साक्षात्कार साक्षात्कार
रस साक्षात्कार रस साक्षात्कार साक्षात्कार साक्षात्कार सदा ही सदा सदा ही
साक्षात्कार के रस रूप साक्षात्कार रस साक्षात्कार रूप से साक्षात्कार सदा ही
रस रस साक्षात्कार साक्षात्कार सदा रस रस सदा ही स्वरूप रस रस रस
स्वरूप रस रूप नित्य के रस रूप के रस स्वरूप रूप रस में, स्वरूप
रस स्वरूप के रसिकता रूप नित्य व स्वरूप, व स्वरूप, व स्वरूप,
स्वरूप, रस के नित्य स्वरूप नित्य स्वरूप में, रस ही रस नित्य स्वरूप से स्वरूप व
स्वरूप।
इस सब रूप का रस प्रत्यक्ष स्वरूप ही रहा, उस रस रूप नित्य ही रस
साक्षात्कार सदा ही सदा रस साक्षात्कार सदा रहा।
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