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सर्वकोश
अकथ कहानी प्रेम की (कबीर प्रेम गाथा एवं दृष्टान्त)

अकथ कहानी प्रेम की (कबीर प्रेम गाथा एवं दृष्टान्त)

Akath Kahani Prem Ki (Kabir's Tales of Love)

ओशो (आचार्य रजनीश) द्वारा

स्रोत: अकथ कहानी प्रेम की (कबीर प्रेम गाथा एवं दृष्टान्त) · ओशो इंटरनेशनल फाउंडेशन · 1976 (उद्गम)

DevanagariHindipublished183 पृष्ठ

पृष्ठ 70, कुल 183 में से

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विचार करो कि जिस समय मनुष्य अ--विद्वान् था उस समय भी सत्य ही बोलता था जब कोई
विद्या उसको अ--सिखाई, जिससे वह सत्य बोलता था; जिसने सत्य रचा उसी सत्य
स्वरूप का यह उपदेश; सत्य स्वरूप न हो तो संशय; सत्य स्वरूप ही का यह सत्य वेद
का उपदेश; सत्य स्वरूप परमात्मा का ही यह उपदेश
अब यह संशय रह गया जिस समय किसी भाषा अथवा मनुष्य की उत्पत्ति ही नहीं हुई
विद्या सिखाई किसने जो सत्य बोले अथवा सत्य जाने अथवा जो उपदेश ही किस बात का? हे
भाई, हे सज्जनो, हे मित्र, हे विचार--वान्, जिससे यह सब हुआ उसने क्या विद्या न
दिया जब कि स्वरूप ही प्रकाश का स्वरूप तेज का, जिसने आत्मा को प्रकाश किया अ--विद्या
सब निवृत्त कर के अन्तःकरण में यह उपदेश, कि सब सत्य जानो न विद्या न आत्मा
का ज्ञान न स्वरूप यह ईश्वर सब विद्या-प्रकाश स्वरूप का अन्तर्यामीस्वरूप
परमात्मा विद्यमान था सो यह विद्या-प्रकाश किया, जिससे यह जाना व माना कि वह
सब विद्या का भी प्रकाशक
जिसने सब को बनाया वह सब सब विद्या जान ही सकता था, विद्या रचा,
प्रकाश रचा; जिससे कि सब ज्ञान का सो सब वेद रचा सो सर्वशक्ति का यह ज्ञान, सो
शक्तिवान् जिस को विचार प्रकाश सब में विचार दिया सो सर्व शक्तिवान् विद्या का
प्रकाशवान् सब का प्रकाश विद्या का सो ईश्वर को सत्य ही जान सो, जिसने यह
भी रूप रच कर विद्या प्रकाश सब किया सो? ईश्वर सब प्रकाशक; जिस का तेज
प्रकाशमान सब का तेज रचा; जिस की शक्ति स्वरूप से सब रूप का तेज रचा;
चराचर-परमेश्वर जिस का यह स्वरूप ही सत्य अ--द्वैत परमात्मा जग रचयिता सब विद्या
प्रकाशक सर्वव्यापक सब विद्या सब सत्य प्रकाश सब आत्मा स्वरूप जिसने यह
आत्मा प्रकाशमान; जिसने परात्पर स्वरूप जगत् रचा सो ईश्वर सत्य; परमात्मा
स्वरूप सत्य सो, सो सब प्रकाशक जगत् का, सो सब अन्तर्यामी सब अ--द्वैत सत्य
जग का रचा! सो सब जगत् रच अ--द्वैत सत्य रूप जग रचा!
ईश्वर का उपदेश सब को, जो सत्य का, उपदेश, जिसने सब बनाया, जिस
रूप का प्रकाशवान् रचा, जिसको सब विधि सब रीति सब अ--द्वैत सत्य विद्या
सब रचा! सो सत्य का प्रकाश सो ही, सत्य ही सत्य उपदेश रचा? जिसका यह
उपदेश! जो सत्य स्वरूप का ही प्रकाश सब विचार सत्यस्वरूप सत्य का ही
स्वरूप ही प्रकाशवान् ज्ञान दाता सब ही का विचार सब विद्या सब प्रकार सब
प्रकाश जग का प्रकाशक रचा
विद्या सब का रूप रचा, सो विचार दिया, विद्या रूप विचार ही सत्य का ज्ञान
सब ईश्वर का प्रकाश ज्ञान का सब रचयिता का अन्तर्यामी रचा; जिस का ज्ञान
सब सत्य का ज्ञान सो सब रचा सो, सो विचार सब विद्या सब ईश्वर का ज्ञान,
परमात्मा ही सत्य का तेज रचा सो प्रकाश सब का तेज रचा सो, सो ईश्वर सर्व
ज्ञानवान्-सच्चा ज्ञान सब रूप जग का प्रकाश रूप का विचार सब का
ज्ञान विचार सब में दिया विद्या-प्रकाश सब में विचार ही प्रकाश का रचा,
सो विचार था, सब रूप का तेज रच अ--द्वैत विद्या रचा, विद्या सत्य रचा! सब रूप
विचार रूप का रचा सो?
ईश्वर का रचा सो रूप-सत्य जगत् सब का विद्या सत्य विचार का विचार
विद्या विचार सब रचा सो? सत्य विचार का उपदेश, सत्य विचार का रचा! सत्य जान
सब विचार प्रकाश का सत्य जगत्-रचा सो! सत्य विचार का रचा! सत्य का
प्रकाश रचा
जब विद्या सब ज्ञान सब रूप का रचा सब विद्या, ज्ञान रूप का ही
सो ज्ञानवान् सत्य ही सब रूप का सो परमात्मा का रचा सत्य विद्या--रूपी का
प्रकाश उपदेशक रचा; जिससे कि सब उपदेश रचा, उपदेश रचा! जिस का
रूप-सत्य रचा सो, ज्ञानवान् ज्ञान अ--द्वैतवान् रचा! जग-प्रकाश रचा जगत्
सत्य रचा, विद्या का प्रकाश रचा, जिसका सो विद्या अ--द्वैतवान्! विद्या
रचा परमेश्वर
जिसने सब का रूप विद्या रचा सो ज्ञानवान् का रूप का रूप, विद्या रचा, ज्ञान-
दाता रूप न जो जग-रूपी रूप विद्या रचा रचा सो परमात्मा रूप न
परमात्मा; सो सब प्रकाशवान् ज्ञान विद्या रूप में रचा सो, जो कि सब ज्ञान रूप
विद्या का ही ज्ञानवान् सब जग का विद्या रचा ज्ञान रूप सो, ज्ञानवान्
रचा सो, रूप रचा विद्या रचा सो सब विद्या रचा रचा रूप परमात्मा
रूप सो सब का रूप रचा सो? सो ज्ञान का तेज विद्या रूप सो सब ज्ञान रूप का ही
प्रकाश का रूप रचा ज्ञान का रचा सो जग सब प्रकाशक सो, सत्य ही रूप का रचा
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