अकथ कहानी प्रेम की (कबीर प्रेम गाथा एवं दृष्टान्त)
Akath Kahani Prem Ki (Kabir's Tales of Love)
ओशो (आचार्य रजनीश) द्वारा
स्रोत: अकथ कहानी प्रेम की (कबीर प्रेम गाथा एवं दृष्टान्त) · ओशो इंटरनेशनल फाउंडेशन · 1976 (उद्गम)
पृष्ठ 63, कुल 183 में से
संदर्भ में पढ़ेंकहना कि जब तक तुम्हारा उद्धार नहिं ! सो तुम्हारा जो पाप सो सब गया! यह सुनकर सबी
लोगन को, जितिक लोग वहां हुते सब को मन बहुत प्रसन्न भया मानो के सबन को नया जिउ
दिया वा मानो रंक को पारस मिल गया मानो के सब लोग नरक से स्वर्ग में गये सो इस
साखी से क्या शिक्षा मिली?
एक तो संसार सब पाप में भरा, दूसरा जो पाप में सो नर्क जाय ऐसा जो पाप
सबन ऊपर सवार भया सब जन नरक में गिर गये सो गिरते गिरते, अब जो प्रभु ईसा मसी
का नाम सुना मानो अमृत पिया, सो पाप मिट गया सो मानो नरक से स्वर्ग में गये, फिर
पश्चात्ताप किया सब जन मुक्ति पाये! तिस लिये सब को भला काम सब को मन से
करना सब जन मुक्ति पावैगे यह शिक्षा ली जानी
अब सब जन मन शुद्ध मन से सुनो दूसरो जो वचन है सो सब बालकरूपन सब को
सो इस वचन परमेश्वर सब जन को मन से सुनो सब जन! बालकरूप बालकरूप
सब लोग भये?
सो इस बात का मन में विचार न करो ऐसा जो सब लोग न भये; फिर यह न
समझना अपना मन में जो हम लोग बालक तो नहिं बन सकते वा जो लोग बड़े हुवे
सोई लोग तो ऐसा न समझो, बालकरूप रूप बालक सब लोग हो, .प्रभु का वचन
सब जन मानो भला काम करो
बालक जो सो बात सीखे सीखे, सब बात सीखे तो कहे, वा सीखे तो
चले, सब बालक तो जहां सीखे तहां बालक चले सो कहे, बालक तो मन का सब
भेद अपना बतलावे बालक का हृदय सदा निर्मल भया सो मन सदा काम करे
बालक तो कपटी काम नहिं काम करे
सो कपटी काम से सब दूरि रहो, कपटी काम जिसका हृदय भया सो क्या
पावेगा? सब जन भला काम करो
हां, यह जो संसार में सो अज्ञानता से, जिसका अज्ञान भया सो नरक को
सो जाता है जो सो इस अज्ञानता को दूरि करो सो ज्ञान को करो सब लोगन कपट
काम त्याग दो, कपट को मार दो, कपट काम नहिं करो; बालकरूप बनों सो
बालकरूप काम सब लोग करो
कपट सब हृदय से त्याग करो? पश्चात्ताप सब जन करो अपने पाप, जो
पाप सो हृदय सब का सब को मारता, उस कपट को हृदय से त्याग करोगे?
कपट को त्याग दो सब से प्यार सो करो, उस कपट को त्याग जो
करोगे? --जिसके मन सब का प्यार निर्मल हो सब मन सब संसार का सो
निर्मल रूप निर्मल हो कपट से दूर हो कपट को निकालो; जो पाप हो,
सो सब को, प्रभु का जो ध्यान कर--जिसके सब पाप निर्मल भया निर्मल
मन निर्मल सब जन करो, पश्चात्ताप सब जन पश्चात्ताप सब जन जो पाप
हो! तिस लिये पश्चात्ताप सब जन पश्चात्ताप करो प्रभु से प्रार्थना कर, पश्चात्ताप करो--फिर
सब, कपट को दूर कर, रो-रोकर प्रभु से दया की मांग करो प्रभु सब के
पाप क्षमा करेगा सब जन को ज्ञान प्रभु न सिखाया, उस ज्ञान विचार के
निर्मल हृदय सब जन करो ऐसा काम करो, कपट काम त्याग करो सब
बालक बन जाओ प्रभु कहे, कपट तज कपट काम त्याग करो सब से मेल-
जोल रखो
कपट हृदय सब जन का मार सब जन पाप रूप कर सब जन
जिसका हृदय कपट हो, सो नरक में जाता कपट काम त्याग करो सब
जन, सो सब जन कपट रूप को त्याग के निर्मल, प्रभु से दया की
प्रार्थना
मांग के निर्मल हृदय बनो--सब जन प्रभु को, बालकरूप बनो,
बालकरूप हो, बालक के मन छल नहिं सो उस जन को प्रभु दया करेगा सो
दयालु परमेश्वर सब जन, दयालु रूप देखकर बालकरूप को दया करे, ज्ञान
देगा सो ज्ञान पाके स्वर्ग को, सब जन प्राप्त हो सो, प्रभु का नाम,
ईशवर, ईशवर का नाम स्मरण के रूप में सब जन, सो सो फल पाओ सब
जनो! सो ईशवर-ईशवर का नाम नित्य नित्य बालकरूप बन पश्चात्ताप करेगा
सो सब जन को ज्ञान पश्चात्ताप सब जन को ईशवर-ईशवर का
नाम सब जन प्रभु को जपते रहो पश्चात्ताप प्रभु चरणन में नित्य
सो तो सब बालकरूप रूप बनो नित्य जन सब सो प्रभु से दया पाओ प्रभु
का ज्ञान
63