न्यायसिद्धान्तमुक्तावली / भाषापरिच्छेद (महामहोपाध्याय विश्वनाथ पंचानन - स्वामी गोविन्द सिंह सविस्तार हिन्दी टीका)
Nyayasiddhantamuktavali with Bhashaparichchheda
विश्वनाथ पंचानन भट्टाचार्य (टीकाकार: स्वामी गोविन्द सिंह) द्वारा
परिच्छेदः ५ ] भाषाटीकासमेता. ३२३
शब्दानामुत्पादविनाशप्रत्ययशालित्वादनित्यत्वमित्यर्थः ।
भाषा- अर्थात् यावत् शब्दोंमें उत्पाद विनाश प्रत्यय विषयता है. इसलिये इनमें
अनित्यता माननी उचित है.
ननु स एवायं ककार इत्यादिप्रत्यभिज्ञानाच्छब्दानां नित्यत्वम्।
इत्थं चोत्पादविनाशबुद्धिर्भ्रमरूपैवेत्यत आह, सोऽयं क इति-
शंका-" स एवायं ककारः-अर्थात् यह वही ककार है" इत्यादि प्रत्यभिज्ञा-
त्मक ज्ञानसे शब्दोंमें नित्यता प्रतीत होती है, इसलिये उनमें उत्पादविनाशाव-
गाहिनी बुद्धि भ्रमरूपाही माननी उचित है. समाधान-इसका उत्तर 'सोऽयं कः '
इत्यादि ग्रन्थसे मूलकारस्वयं देतेहैं-
सोऽयं क इति बुद्धिस्तु साजात्यमवलम्बते ॥१६७ ॥
भाषा-"सोऽयं कः-अर्थात् यह वही ककार है" इत्याकारक बुद्धि ककारादि-
निष्ठ साजात्यका ग्रहण करतीहै ॥ १६७ ॥
साजात्यमिति।तत्र प्रत्यभिज्ञानस्य तत्सजातीयत्वं विषयो न तु
तद्व्यक्त्यभेदो विषयः, उक्तप्रतीतिविरोधात् । इत्थं द्वयोरपि प्रती-
त्योर्नभ्रमत्वमिति ॥ १६७ ॥
भाषा-ऐसे स्थलमें प्रत्यभिज्ञात्मक ज्ञानका ककारादि सजातीयत्व विषय है,
किन्तु ककारादिव्यक्तिका अभेद विषय नहीं; क्योंकि ( उक्त ) उत्पादविनाशशाली
प्रत्ययके साथ विरोध है. ( इत्थञ्च ) इस रीतिसे प्रत्यभिज्ञात्मक ज्ञानको साजात्याव-
गाहि माना तो उत्पादप्रतीति तथा प्रत्यभिज्ञात्मक ज्ञान इन दोनों बुद्धियोंको
भ्रमरूपता नहींहै ॥ १६७ ॥
ननु सजातीयत्वं सोऽयमिति प्रत्यभिज्ञायां भासत इति कुत्र दृ-
ष्टमित्यत आह, तदेवेति-
शंका-'सोऽयं' इत्यादि प्रत्यभिज्ञात्मक ज्ञानमें सजातीयत्वका भान आपने
कहां देखा है ? समाधान-इसका उत्तर 'तदेव' इत्यादि ग्रन्थसे मूलकार
स्वयं देतेहैं-
तदेवौषधमित्यादौ सजातीयेऽपि दर्शनात् ॥
तस्मादनित्या एवेति वर्णाः सर्वे मतं हि नः॥१६८ ॥
भाषा-"तदेवौषधं-अर्थात् यह वही औषध है" इत्यादिस्थलोंमें सजातीय
पदार्थोंमेंभी प्रत्यभिज्ञात्मक ज्ञान देखनेमें आता है. इसलिये सम्पूर्ण वर्ण अनित्यही
हैं. यह हमारा सिद्धान्त है ॥ १६८ ॥
यदौषधं मया कृतं तदेवान्येनापि कृतमित्यादिदर्शनादिति-
भावः ॥ १६८ ॥ ॥ इति सिद्धान्तमुक्तावल्यां गुणनिरूपणम् ॥
भाषा-‘जो औषधी मैंने करी थी वही औषधी दूसरे पुरुषनेभी करीहै’ इत्यादि
स्थलमें सजातीयत्वका भान होताहै. भाव यह कि-जो औषधी मैंने करी है
वस्तुतः वह औषधी वह नहींहै जो कि, दूसरेने करीहै; किन्तु उसी जातिकी दूसरी
औषधी है-इति ॥
इति श्रीमहामहोपाध्यायविद्यानिवासभट्टाचार्यपुत्रश्रीयुतवि-
श्वनाथपञ्चाननभट्टाचार्यविरचिता न्यायसिद्धान्तमु-
क्तावली संपूर्णा ।
कतार सर्वलोकानां भर्तारं सर्वप्राणिनाम् ॥
हर्तारं सर्वविघ्नानामाश्रये जानकीप्रियम् ॥ १ ॥
संसाराम्बुधितारणैकतरणी पूताप्रिया यस्य गीः
श्रेष्ठाचारविचारणैकजननी लोकोत्तरा यस्य धीः ॥
तुर्कव्यूहविनाशनेऽतिसबला तेजोमयी यस्य भी-
र्वन्द्योऽसौ गुरुनानको गुरुवरो गोविन्दसिंहस्तथा ॥ २ ॥
श्रीठाकुरपदबोध्यं स्वर्वाङ्किरणापहृतदासहृद्ध्वान्तम् ॥
त्रेधा नमामि सततं श्रीसद्गुरुनिहालसिंहार्कम् ॥ ३ ॥
: श्रीकाश्यां निवसन्तो विज्ञाः श्रीशिवकुमारमिश्राद्याः ॥
मूर्द्धा मे ते मान्या हृदा तु गुरुराममिश्रवराः ॥ ४ ॥
भूतबाणग्रहक्षौणी वैक्रमे वत्सरे वरे ॥
पौषशुल्कांद्वितीयायां ग्रन्थः पूर्तिमगादयम् ॥ ५ ॥
इति श्रीमद्दुःखभञ्जन्याश्रमाधिपतिनिर्मलोदग्रपूज्यपादश्रीठाकुरनिहालसिंहपादपाथो
जप्रैष्यगण्डासिंहपरनामक गोविन्दसिंहसाधुकृते आर्यभाषाविभूषितन्यायमु-
क्तावलीप्रकाशे गुणनिरूपणम् ॥ समाप्तश्चायं ग्रन्थः ॥ इतिशम् ॥
पुस्तक मिलनेका पता-खेमराज श्रीकृष्णदास,
“ श्रीवेङ्कटेश्वर ” छापाखाना, खेतवाड़ी--बम्बई.
or (d) Jain Philosophy & Literature
Syadvada Manjari
Sutra Kratanga I–VI
Uttaradhyayana I–X
- The following books not to be regarded as text
books are recommended for study.
- Mrs. Sinclair Stevenson, Heart of Jainism
- Dharma Bhushana Nyayadipika
- Jacobi Translation of the Jaina
Sutras (Sacred Books of the East
Series) - Jacobi Articles in Hastings Encyclo-
paedia of Religion & Ethics
Paper IV History of Sanskrit Literature
The following books not to be regarded as text
books are recommended for study
Macdonell A History of Sanskrit Literature
Ghate Lectures in Rigveda
Deussen Philosophy of Upanishads
Deussen The Cambridge History of India
Hopkins, The Great Epic of India
Keith Indian Drama.
Paper V General Principles of Comparative
Philology with Illustrations from the
development of the Indian Sanskrit
Languages; Vedic Grammar.
The following books not to be regarded as
text books are recommended for study
Macdonell – Vedic Grammar for Students
Uhlenbeck – Manual of Sanskrit
Phonetics
Woolner – Introduction to Prakrit
Bhandarkar – Wilson Philological Lectures
Grierson – Articles in Encyclopaedia Britannica
Gune – Introduction to Philology
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