सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
न्यायमञ्जरी: प्रथम भाग (आचार्य जयन्त भट्ट - पं. सूर्यनारायण शुक्ल सम्पादित, काशी संस्कृत ग्रन्थमाला)

न्यायमञ्जरी: प्रथम भाग (आचार्य जयन्त भट्ट - पं. सूर्यनारायण शुक्ल सम्पादित, काशी संस्कृत ग्रन्थमाला)

Nyayamanjari of Jayanta Bhatta Part 1

आचार्य जयन्त भट्ट (सम्पादक: पं. सूर्यनारायण शुक्ल) द्वारा

DevanagariHindipublished654 पृष्ठ

पृष्ठ 76, कुल 654 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 76

असत्वव्यवहारो हि (8) सिध्यत्यनुपलब्धितः (8) ॥
Line 11: एकान्तानुपलब्धेषु (8) विहायःकुसुमादिषु (8) ।
Line 12: Wait! If line 11 is pāda a and b:
एकान्तानुपलब्धेषु (8) विहायःकुसुमादिषु (8) ।
Then line 12:
(असत्वाधीन) - wait, why is (असत्वाधीन) in parentheses?
Wait, is it:
(असत्त्वाधीन) then दृश्यत्वयोग्यताऽनवधारणात्।?
दृश्यत्वयोग्यताऽनवधारणात् = दृश्य-त्व-यो-ग्य-ता-(5) ऽन-व-धा-र-णात् (6) = 11 syllables!
Wait, if line 12 has (असत्वाधीन):
Could it be an alternate reading inserted in parentheses by the editor?
Yes! Some manuscripts read असत्त्वाधीन- or something, or it's a gloss / variant reading.
Wait, let's read line 12 and 13:
Line 12: (असत्वाधीन) दृश्यत्वयोग्यताऽनवधारणात्।
Line 13: `न शक्यो ऽनुपलम्भेन कर्तु नास्तित्वनिश्चयः