न्यायमञ्जरी: प्रथम भाग (आचार्य जयन्त भट्ट - पं. सूर्यनारायण शुक्ल सम्पादित, काशी संस्कृत ग्रन्थमाला)
Nyayamanjari of Jayanta Bhatta Part 1
आचार्य जयन्त भट्ट (सम्पादक: पं. सूर्यनारायण शुक्ल) द्वारा
पृष्ठ 65, कुल 654 में से
संदर्भ में पढ़ेंuro-
Wait, "हविरार्त्तिमाच्छदितिवत्"?
Look at L20: "हविरार्त्तिमाच्छदितिवत्" - wait, look at footnote (2):
"यस्योभयं हविरात्तिमाच्छेद्"
In L20: "हविरार्त्तिमाच्छदितिवत्" or "हविरार्त्तिमाच्छे्दितिवत्"?
Look at the letter: 'च्छ' with an 'े' matra: "हविरार्त्तिमाच्छे्दितिवत्" or "हविरार्त्तिमाच्छदितिवत्"?
There is an e-matra: look at the top stroke on 'च्छ'! Yes, "हविरार्त्तिमाच्छे्दितिवत्" or "हविरार्त्तिमाच्छेदितिवत्" or "हविरार्त्तिमाच्छदितिवत्"? Wait, the e-matra is faint or missing, but wait, look above 'च्छ': there's a top slant!
Wait, look at footnote 2: "हविरात्तिमाच्छे्दैन्द्रं" -> "हविरातिर्माच्छेद् वैन्द्रं" / "हविरात्तिमाच्छेद्".
In L20: "(२) क चिदन्यथा स्थितानि तदनुरो-"
Yes, "तदनुरो-" at the end of L20!
L21:
धादन्यथैव स्थाप्यन्ते प्रयाज