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सर्वकोश
न्यायमञ्जरी: प्रथम भाग (आचार्य जयन्त भट्ट - पं. सूर्यनारायण शुक्ल सम्पादित, काशी संस्कृत ग्रन्थमाला)

न्यायमञ्जरी: प्रथम भाग (आचार्य जयन्त भट्ट - पं. सूर्यनारायण शुक्ल सम्पादित, काशी संस्कृत ग्रन्थमाला)

Nyayamanjari of Jayanta Bhatta Part 1

आचार्य जयन्त भट्ट (सम्पादक: पं. सूर्यनारायण शुक्ल) द्वारा

DevanagariHindipublished654 पृष्ठ

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पृष्ठ 642

२० न्यायसूत्रोद्धारे-
न दोषलक्षणावरोधान्मोहस्य ॥ ८ ॥
नित्यनैमित्तिकोपपत्तेश्च तुल्यजातीयानामप्रतिषेधः ॥ ९ ॥
आत्मनित्यत्वे प्रेत्यभावसिद्धिः ॥ १० ॥
व्यक्ताद्व्यक्तानां प्रत्यक्षप्रामाण्यात् ॥ ११ ॥
न घटाद् घटानिष्पत्तेः ॥ १२ ॥
व्यक्ताद् घटनिष्पत्तेरप्रतिषेधः ॥ १३ ॥
अभावाद्भावोत्पत्तिर्नानुपमृद्य प्रादुर्भावात् ॥ १४ ॥
व्याघातादप्रयोगः ॥ १५ ॥
नातीतानागतयोः कारकशब्दप्रयोगात् ॥ १६ ॥
न विनष्टेभ्योऽनिष्पत्तेः ॥ १७ ॥
क्रमनिर्देशादप्रतिषेधः ॥ १८ ॥
ईश्वरः कारणं पुरुषकर्माफल्यदर्शनात् ॥ १९ ॥
न पुरुषकर्माभावे फलानिष्पत्तेः ॥ २० ॥
तत्कारितत्वादहेतुः ॥ २१ ॥
अनिमित्ततो भावोत्पत्तिः कण्टकतैक्ष्ण्यादिदर्शनात् ॥ २२ ॥
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