न्यायमञ्जरी: प्रथम भाग (आचार्य जयन्त भट्ट - पं. सूर्यनारायण शुक्ल सम्पादित, काशी संस्कृत ग्रन्थमाला)

न्यायमञ्जरी: प्रथम भाग (आचार्य जयन्त भट्ट - पं. सूर्यनारायण शुक्ल सम्पादित, काशी संस्कृत ग्रन्थमाला)
Nyayamanjari of Jayanta Bhatta Part 1
आचार्य जयन्त भट्ट (सम्पादक: पं. सूर्यनारायण शुक्ल) द्वारा
DevanagariHindipublished654 पृष्ठ
पृष्ठ 631, कुल 654 में से
संदर्भ में पढ़ेंपृष्ठ 631
| || ३० ||
Wait! Look at the alignment of line 18 with line 17:
Line 17 has 21 aksharas before ॥ २९ ॥
Line 18 has:
अ (1) न्य (2) द (3) न्य (4) स्मा (5) द (6) न (7) न्य (8) त्वा (9)
द (10) न्य (11) दि (12) त्य (13) न्य (14) ता (15) भा (16) वः (17)
Wait! 17 aksharas!
If line 18 had 17 aksharas, that's only:
अ-न्य-द-न्य-स्मा-द-न-न्य-त्वा-द-न्य-दि-त्य-न्य-ता-भा-वः !
Wait, let's count:
अ (1)
न्य (2)
द (3)
न्य (4)
स्मा (5)
द (6)
न (7)
न्य (8)
त्वा (9)
द (10)
न्य (11)
दि (12)
त्य (13)
न्य (14)
ता (15)
भा (16)
वः (17)
Wait, let's look at letter 10 and 1