न्यायमञ्जरी: प्रथम भाग (आचार्य जयन्त भट्ट - पं. सूर्यनारायण शुक्ल सम्पादित, काशी संस्कृत ग्रन्थमाला)

न्यायमञ्जरी: प्रथम भाग (आचार्य जयन्त भट्ट - पं. सूर्यनारायण शुक्ल सम्पादित, काशी संस्कृत ग्रन्थमाला)
Nyayamanjari of Jayanta Bhatta Part 1
आचार्य जयन्त भट्ट (सम्पादक: पं. सूर्यनारायण शुक्ल) द्वारा
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िपुणमिह मया षोडशैते पदार्थाः ॥-> wait,निपुणमिह, no avagraha. निर्णीताः स्वे निबन्धे निपुणमिह मया षोडशैते पदार्थाः ॥`
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न्यायोद्गारगभीरनिर्मलगिरा गौरीपतिस्तोषितो -
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वादे येन किरीटिनेव समरे देवः किराताकृतिः । -
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प्राप्तोदारवरस्ततः स जयति ज्ञानामृतप्रार्थना- -
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नाम्ना ऽनेकमहर्षिमस्तकवलत्पादो ऽक्षपादो मुनिः ॥ -
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वादेष्वाप्तजयो जयन्त इति यः ख्यातः सतामग्रणी- -
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र्ग्रन्थौ नववृत्तिकार इति यं शंसन्ति नाम्ना बुधाः । -
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सूनुर्व्याप्तदिगन्तरस्य यशसा चन्द्रस्य चन्द्रत्विषा -
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चक्रे चन्द्रकलावचूलचरणध्यायी स धन्यां कृतिम् ॥ -
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