सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
न्यायमञ्जरी: प्रथम भाग (आचार्य जयन्त भट्ट - पं. सूर्यनारायण शुक्ल सम्पादित, काशी संस्कृत ग्रन्थमाला)

न्यायमञ्जरी: प्रथम भाग (आचार्य जयन्त भट्ट - पं. सूर्यनारायण शुक्ल सम्पादित, काशी संस्कृत ग्रन्थमाला)

Nyayamanjari of Jayanta Bhatta Part 1

आचार्य जयन्त भट्ट (सम्पादक: पं. सूर्यनारायण शुक्ल) द्वारा

DevanagariHindipublished654 पृष्ठ

पृष्ठ 622, कुल 654 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 622

िपुणमिह मया षोडशैते पदार्थाः ॥-> wait,निपुणमिह, no avagraha. निर्णीताः स्वे निबन्धे निपुणमिह मया षोडशैते पदार्थाः ॥`

  • Line 22:
    न्यायोद्गारगभीरनिर्मलगिरा गौरीपतिस्तोषितो

  • Line 23:
    वादे येन किरीटिनेव समरे देवः किराताकृतिः ।

  • Line 24:
    प्राप्तोदारवरस्ततः स जयति ज्ञानामृतप्रार्थना-

  • Line 25:
    नाम्ना ऽनेकमहर्षिमस्तकवलत्पादो ऽक्षपादो मुनिः ॥

  • Line 26:
    वादेष्वाप्तजयो जयन्त इति यः ख्यातः सतामग्रणी-

  • Line 27:
    र्ग्रन्थौ नववृत्तिकार इति यं शंसन्ति नाम्ना बुधाः ।

  • Line 28:
    सूनुर्व्याप्तदिगन्तरस्य यशसा चन्द्रस्य चन्द्रत्विषा

  • Line 29:
    चक्रे चन्द्रकलावचूलचरणध्यायी स धन्यां कृतिम् ॥

  • Line 30

न्यायमञ्जरी: प्रथम भाग (आचार्य जयन्त भट्ट - पं. सूर्यनारायण शुक्ल सम्पादित, काशी संस्कृत ग्रन्थमाला) · पृष्ठ 622, कुल 654 में से · SarvaKosh