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सर्वकोश
न्यायमञ्जरी: प्रथम भाग (आचार्य जयन्त भट्ट - पं. सूर्यनारायण शुक्ल सम्पादित, काशी संस्कृत ग्रन्थमाला)

न्यायमञ्जरी: प्रथम भाग (आचार्य जयन्त भट्ट - पं. सूर्यनारायण शुक्ल सम्पादित, काशी संस्कृत ग्रन्थमाला)

Nyayamanjari of Jayanta Bhatta Part 1

आचार्य जयन्त भट्ट (सम्पादक: पं. सूर्यनारायण शुक्ल) द्वारा

DevanagariHindipublished654 पृष्ठ

पृष्ठ 606, कुल 654 में से

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पृष्ठ 606

पि विकल्पनीयम् , प्रसज्यप्रतिषेधवृत्त्या Wait, is itप्रसज्यप्रतिषेधवृत्त्या? Look at the word at end of L5: प्रसज्यप्रतिषेधthenवृत्त्या: वृ(v with r-vowel),त्त्या(double t with ya). Yes,प्रसज्यप्रतिषेधवृत्त्या`!

  • :
    साधनाङ्गस्यावचनमिति चेत्सेयमप्रतिपत्तिः, अतः शब्दान्तरेणाक्षपाददेश्य
    Wait, look at the end of L6:
    अतः शब्दान्तरेणाक्षपाददेश्य - wait, is there an avagraha or anything?
    अतः शब्दान्तरेणाक्षपाददेश्य
    Then L7 starts: एव शिक्षित्वा...
    Wait, "अक्षपाददेश्य एव शिक्षित्वा"?
    Wait, could it be अक्षपादशिष्य? No, it's अक्षपाददेश्य (meaning pseudo-Akshapada / follower of Akshapada).

  • :
    एव शिक्षित्वा तदेव निग्रहस्थानद्वयमेन श्लोकेन निबद्धं न पुनरभिनवमल्पमपि
    Wait, is it द्वयमेन or द्वयमेतेन?
    The image has `द्व