न्यायमञ्जरी: प्रथम भाग (आचार्य जयन्त भट्ट - पं. सूर्यनारायण शुक्ल सम्पादित, काशी संस्कृत ग्रन्थमाला)

न्यायमञ्जरी: प्रथम भाग (आचार्य जयन्त भट्ट - पं. सूर्यनारायण शुक्ल सम्पादित, काशी संस्कृत ग्रन्थमाला)
Nyayamanjari of Jayanta Bhatta Part 1
आचार्य जयन्त भट्ट (सम्पादक: पं. सूर्यनारायण शुक्ल) द्वारा
DevanagariHindipublished654 पृष्ठ
पृष्ठ 586, कुल 654 में से
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्तौव? No, it's सत्तैव. Let's look at कुतो ऽस्य`: space before avagraha.
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Line 20:
क्रोशनशक्तिर्निषिध्यते । -
Line 21:
समाधिरपि साधारणशब्दानभिज्ञतां परस्य दर्शयता वाक्छले वाच्यः
Wait, is itदर्शयताorप्रदर्शयता?
Look at the word beforeदर्शयता:
प र स्यthenप्र दर्शयता?
Wait! Look beforeदर्शयता: there is aप्र!
प्रदर्शयता! Yes,प्र दर्श य ता.
Wait, let's re-read:
समाधिरपि साधारणशब्दानभिज्ञतां परस्य प्रदर्शयता वाक्छले वाच्यः- wait, is there a danda or colon after वाच्यः?
There is a colon-like mark or visarga:वाच्यः(visarga). -
Line 22:
उपचारच्छले तु गौणादिशब्दवृत्त्यनभिज्ञतामिति महान्विशेषः । -
Line 23:
`अविशेषे वा किंचित्साधर्म्यादे