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सर्वकोश
न्यायमञ्जरी: प्रथम भाग (आचार्य जयन्त भट्ट - पं. सूर्यनारायण शुक्ल सम्पादित, काशी संस्कृत ग्रन्थमाला)

न्यायमञ्जरी: प्रथम भाग (आचार्य जयन्त भट्ट - पं. सूर्यनारायण शुक्ल सम्पादित, काशी संस्कृत ग्रन्थमाला)

Nyayamanjari of Jayanta Bhatta Part 1

आचार्य जयन्त भट्ट (सम्पादक: पं. सूर्यनारायण शुक्ल) द्वारा

DevanagariHindipublished654 पृष्ठ

पृष्ठ 49, कुल 654 में से

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पृष्ठ 49

पृष्ठभाविनां विकल्पानामेव च दर्शनविषये कृतपरिच्छेदतदितरवि-
Wait, "तथा ऽपि": there is a space before ऽपि.

Line 26:
षयव्यवच्छेदतृतीयप्रकाराभावव्यवस्थापनपर्यन्तव्यापारपाटवमवगन्तव्यमितर-

Line 27:
था व्यवहाराभावात् , एवं च परस्परं परिहारव्यवस्थितस्वरूपपदार्थव्यवच्छेदि-
Note the space before comma: व्यवहाराभावात् ,

Line 28:
प्रत्यक्षप्रभावावगतविरोधात्प्रत्यक्षेतरविषययोस्तृतीयविषयासत्त्वपरिनिश्चये ऽनु-
Note space before ऽनु: ऽनु-

Line 29:
मानमपि प्रवर्त्तितुमुत्सहते विरुद्धयोरेकतरपरिच्छेदसमये द्वितीयनिरासनमवश्यं
Note "प्रवर्त्तितुमुत्सहते" with double त्त.

Line 30:
भाति विरुद्धत्वादेव शीतोष्णवन्, तृतीयविषयो ऽपि तद्विरुद्ध एव तद्बुद्धावप्र-
Note: "शीतोष्णवन्," - with halanta न! Yes, look at it: 'शीतोष्णवन्,' with a comma!

Line 31:
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