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सर्वकोश
न्यायमञ्जरी: प्रथम भाग (आचार्य जयन्त भट्ट - पं. सूर्यनारायण शुक्ल सम्पादित, काशी संस्कृत ग्रन्थमाला)

न्यायमञ्जरी: प्रथम भाग (आचार्य जयन्त भट्ट - पं. सूर्यनारायण शुक्ल सम्पादित, काशी संस्कृत ग्रन्थमाला)

Nyayamanjari of Jayanta Bhatta Part 1

आचार्य जयन्त भट्ट (सम्पादक: पं. सूर्यनारायण शुक्ल) द्वारा

DevanagariHindipublished654 पृष्ठ

पृष्ठ 471, कुल 654 में से

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पृष्ठ 471

गुणोत्कर्षस्य नियामकत्वात्, सातिशयगन्धगुणाधिकरणे वि-`

  • L17: जातीयद्रव्यावयवसंस्पर्शलेशरहितैः केवलपृथिव्यवयवैरदृष्टसहकारिभिर्घटितं
  • L18: घ्राणेन्द्रियमिति गन्धस्यैव ग्राहकम्, एतदेव च भूयस्त्वमाचक्षते यथाऽऽह
  • L19: कणादः- [वै० ८।२५] 'भूयस्त्वाद्वन्धवत्त्वाच्च पृथिवी गन्धज्ञानप्रकृतिः', इहा-
    Wait, look at कणादः- [वै० ८।२५] 'भूयस्त्वाद्वन्धवत्त्वाच्च:
    Wait, is it भूयस्त्वाद्वन्धवत्त्वाच्च or भूयस्त्वाद्गन्धवत्त्वाच्च?
    Let's look at द्ग vs द्व:
    The letter under द has a rounded top loop, exactly like ग in गन्धज्ञान?
    Wait, look at गन्धज्ञान right after it: ग has a rounded shoulder and a vertical stroke.
    In भूयस्त्वाद्गन्धवत्त्वाच्च, the letter under द is ग! Wait, it has a flat bottom loop? No, it's ग. Wait