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सर्वकोश
न्यायमञ्जरी: प्रथम भाग (आचार्य जयन्त भट्ट - पं. सूर्यनारायण शुक्ल सम्पादित, काशी संस्कृत ग्रन्थमाला)

न्यायमञ्जरी: प्रथम भाग (आचार्य जयन्त भट्ट - पं. सूर्यनारायण शुक्ल सम्पादित, काशी संस्कृत ग्रन्थमाला)

Nyayamanjari of Jayanta Bhatta Part 1

आचार्य जयन्त भट्ट (सम्पादक: पं. सूर्यनारायण शुक्ल) द्वारा

DevanagariHindipublished654 पृष्ठ

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पृष्ठ 277

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Title:
प्रमाणप्रकरणम् २५५

Heading:
मतान्तरेण धर्मपदार्थस्य निरूपणं तत्खण्डनं च ।

Line 2:
कापिलास्तु अन्तःकरणस्य बुद्धेर्वृत्तिविशेषमाहुः, आर्हताः पुण्यपुद्गलान्
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Line 3:
धर्मत्वेन व्यपदिशन्ति, शाक्यभिक्षवश्चित्तवासनां धर्ममाचक्षते, वृद्धमीमांसकाः
Note: "वृद्धमीमांसकाः" - correct.

Line 4:
यागादिकर्मनिर्वर्त्यमपूर्व नाम धर्ममभिवदन्ति, यागादिकमेव शाबरा ब्रुवते,
Note: "यागादिकमेव शाबरा ब्रुवते," - correct.

Line 5:
वाक्यार्थ एव नियोगात्मा ऽपूर्वशब्दवाच्यो धर्मशब्देन स एवोच्यते इति प्राभा-
Note: "नियोगात्मा ऽपूर्वशब्दवाच्यो" - correct.

Line 6