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सर्वकोश
नीतिवाक्यामृतम् (आचार्य सोमदेव सूरि - पण्डित रामचन्द्र मालवीय सविस्तार हिन्दी व्याख्या सटीक)

नीतिवाक्यामृतम् (आचार्य सोमदेव सूरि - पण्डित रामचन्द्र मालवीय सविस्तार हिन्दी व्याख्या सटीक)

Nitivakyamritam of Somadeva Suri with Commentary

आचार्य सोमदेव सूरि (टीकाकार: पं. रामचन्द्र मालवीय) द्वारा

DevanagariHindipublished220 पृष्ठ

पृष्ठ 95, कुल 220 में से

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पृष्ठ 95

विचारसमुद्देशः ७६
किसी काम को थोड़ा सा करने के बाद उस पूरे काम की रूपरेखा को बुद्धि-
बल से ज्ञान कर लेना निश्चय कर लेना अनुमान है ।
सम्भावितैकदेशो नियुक्तं विद्यात् ॥ १० ॥
किसी कार्य का एक अंश पूरा कर लेने पर पूर्ण कार्य का निश्चय कर
ले । अर्थात् किसी व्यक्ति ने यदि किसी काम के प्रारंभिक अंश को सफलता
के साथ कर लिया तो समझना चाहिए कि वह पूरा काम सफलता के
साथ कर लेगा ।
होनहार राजकुमार के लक्षण—
आकारः शौर्यं प्रज्ञा-सम्पत्तिरायतिर्विनयश्च राजपुत्राणां भाविनो
राज्यस्य लिङ्गानि ॥ ११ ॥
शारीरिक सुन्दर आकार, शूरता, बुद्धिबल, प्रभाव, और विनय ये सब
गुण राजकुमारों के भावी राज्य-शासन के चिह्न हैं । अर्थात् उक्त गुणों को
देखकर यह अनुमान कर लिया जाता है या किया जा सकता है ।
प्राणियों के भविष्य की पहिचान—
प्रकृतेर्विकृतिदर्शनं हि प्राणिनां भविष्यतोः शुभाशुभयोर्लिङ्गम् ॥१२॥
स्वभाव की विकृति ही प्राणियों के भावी शुभाशुभ का चिह्न हैं । अर्थात्
किसी व्यक्ति के स्वभाव में जैसा कुछ भला-बुरा परिवर्तन समय-समय पर
दिखाई पड़े वैसा ही उसका भविष्य जीवन समझे ।
एक कार्य में सफल व्यक्ति को अन्य कार्य में सफलता की संभावना—
एकस्मिन् कर्मणि दृष्टबुद्धिपुरुषकारः कथं नाम न कर्मान्तरे समर्थः ॥१३॥
किसी एक काम में जो अपना बुद्धि और पौरुष प्रदर्शित कर चुका है वह
दूसरे काम में क्यों नहीं समर्थ होगा ?
आगम का लक्षण—
आप्तपुरुषोपदेश आगमः ॥ १४ ॥
आप्त पुरुषों के उपदेश को आगम कहते हैं ।
आप्त का लक्षण—
यथानुभूतामितश्रुतार्थाऽविसंवादिवचनः पुमानाप्तः ॥ १५ ॥
अनुभव, अनुमान और शास्त्रश्रुत अर्थ के अनुसार वचन बोलने वाला
पुरुष आप्त है ।
युक्तिहीन वाक्य की व्यर्थता—
सा वागुक्ताऽप्यनुक्तसमा, यत्र नास्ति सद्युक्तिः ॥ १६ ॥
जिसमें कोई अच्छी युक्ति न दी गई हो ऐसी बात कही हुई भी न कही
जाने के समान है ।