नीतिवाक्यामृतम् (आचार्य सोमदेव सूरि - पण्डित रामचन्द्र मालवीय सविस्तार हिन्दी व्याख्या सटीक)
Nitivakyamritam of Somadeva Suri with Commentary
आचार्य सोमदेव सूरि (टीकाकार: पं. रामचन्द्र मालवीय) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें७६ नीतिवाक्यामृतम्
जिसके समस्त शरीर के अङ्ग छोटे हों वह 'किरात' है।
यमपट्टिको गलत्रोटिकः ॥ १५ ॥
गले में डोरा बाँधकर उसमें नरक के दृश्यों का चित्र पट लटकाए हुए
घर-घर घूमने वाले का नाम 'यमपट्टिक' है।
आहितुण्डिकः सर्पक्रीडाप्रसरः ॥ १६ ॥
सांप का खेल दिखानेवाला मदारी 'आहितुण्डिक' है।
शौण्डिकः कल्पपालः ॥ १७ ॥
शराब बेचने वाला शौण्डिक है।
शौभिकः क्षपायां काण्डपटावरणेन नानारूपदर्शी ॥ १८ ॥
रात्रि के समय पर्दा डालकर अनेक प्रकार का रूप प्रदर्शित करनेवाला
'शौभिक' (बहुरूपिया) है।
पाटच्चरश्चौरो बन्दीकारो वा ॥ १९ ॥
चोर अथवा वन्दी के वेष में वर्त्तमान गुप्तचर 'पाटच्चर' है।
व्यसनिनां प्रेषणाजीवी विटः ॥ २० ॥
वेश्यादि के व्यसनी पुरुषों को वेश्याओं आदि के यहां पहुँचा कर
जीविकोपार्जन करने वाले को 'विट कहते है।
सर्वेषां प्रहसनपात्रं विदूषकः ॥ २१ ॥
सबको हंसी का पात्र 'विदूषक' है।
कामशास्त्राचार्यः पीठमर्दकः ॥ २२ ॥
कामशास्त्र के आचार्य की 'पीठमर्दक' संज्ञा है।
गीताङ्गपटावरणेन नृत्यवृत्त्याजीवी नर्त्तको नाटिकाभिनयरङ्ग-
नर्तको वा ॥ २३ ॥
सङ्गीत में सहायक वस्त्रों से सुसज्जित होकर नृत्य कला द्वारा अपनी
जीविका चलाने वाला अथवा नाटक नाटिका के अभिनय में रङ्गभूमि में
नृत्य करने वाला 'नर्त्तक' है।
रूपाजीवानृत्युपदेष्टा गायकः ॥ २४ ॥
वेश्याओं को उनकी जीविका का साधनभूत नृत्यगान का उपदेश देने
वाला 'गायक' है।
गीतप्रबन्धगतिविशेषवादकचतुर्विधातोद्यप्रचारकुशलो वादकः ॥ २५ ॥
गीत की रचना के अनुसार विशेष ताल लय के साथ सितार, मृदङ्ग,
बांसुरी, मजीरा आदि चार प्रकार के वाद्य में कुशल व्यक्ति 'वादक' है।
वाग्जीवी वैतालिकः सूतो वा ॥ २६ ॥
कविता कथा आदि के द्वारा अपनी वाणी के बल पर जीविकानिर्वा