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सर्वकोश
नीतिवाक्यामृतम् (आचार्य सोमदेव सूरि - पण्डित रामचन्द्र मालवीय सविस्तार हिन्दी व्याख्या सटीक)

नीतिवाक्यामृतम् (आचार्य सोमदेव सूरि - पण्डित रामचन्द्र मालवीय सविस्तार हिन्दी व्याख्या सटीक)

Nitivakyamritam of Somadeva Suri with Commentary

आचार्य सोमदेव सूरि (टीकाकार: पं. रामचन्द्र मालवीय) द्वारा

DevanagariHindipublished220 पृष्ठ

पृष्ठ 44, कुल 220 में से

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पृष्ठ 44

२८ नीतिवाक्यामृतम्
रहती है उनको ऐहलौकिक और पारलौकिक कोई भी सुख नहीं प्राप्त होते ।
कुत्सित पुरुष का लक्षण—
स किंपुरुषो यस्य महाभियोगे सुवंश धनुष इव नाधिकं जायते
बलम् ॥ २५ ॥
अच्छी किस्म के बांस से बनाये गये धनुष पर बाण चढ़ाते समय जिस
प्रकार अधिक दृढ़ता प्रतीत होती है उसी प्रकार महान् आपत्ति आने पर
जिस पुरुष में दृढ़ता न उत्पन्न हो, स्थिरता और गम्भीरता न हो वह पुरुष
कुत्सित पुरुष है ।
इच्छा का लक्षण—
आगामिक्रियाहेतुरभिलाषो वेच्छा ॥ २६ ॥
भविष्य में होने वाली क्रिया का जो कारण है वही अभिलाष अथवा
इच्छा है ।
आत्मनो प्रत्यवायेभ्यः प्रत्यावर्त्तनहेतुर्द्वेषोऽनभिलाषो वा ॥ २७ ॥
दोषों से बचने के उपाय—
अपने को प्रत्यवाय अर्थात् दोषों से बचाये रखने के लिये दो उपाय
हैं । प्रथम उन दोषों और बुराइयों से घृणा करना दूसरा उन दोषों को
करने की इच्छा ही न करना ।
उत्साह का लक्षण—
हिताहितप्राप्तिपरिहारहेतुरुत्साहः ॥ २८ ॥
जिस भाव के कारण मनुष्य की भलाई हो और बुराई दूर हो उसका
नाम उत्साह है ।
प्रयत्न की परिभाषा—
प्रयत्नपरिनिमित्तको भावः ॥ २९ ॥
मनुष्य के हृदय में कार्य करने के निमित्त जो भाव उत्पन्न होता है उसी
का नाम प्रयत्न है ।
संस्कार की दो परिभाषाएं—
सातिशयलाभः संस्कारः ॥ ३० ॥
राजा अथवा जनता से अतिशय आदर आदि की प्राप्ति संस्कार हैं ।
अनेकजन्मकर्माभ्यासवासनावशात् सद्योजातादीनां स्तन्यपिपासा-
दिकं येन क्रियते इति संस्कारः ।
अनेक जन्म में किये गये कर्मों के अभ्यास की वासना के वश होकर
तुरन्त उत्पन्न हुए प्राणी के मन में जो दूध पीने आदि की प्रवृत्ति होती है—
वह संस्कार है ।