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सर्वकोश
नीतिवाक्यामृतम् (आचार्य सोमदेव सूरि - पण्डित रामचन्द्र मालवीय सविस्तार हिन्दी व्याख्या सटीक)

नीतिवाक्यामृतम् (आचार्य सोमदेव सूरि - पण्डित रामचन्द्र मालवीय सविस्तार हिन्दी व्याख्या सटीक)

Nitivakyamritam of Somadeva Suri with Commentary

आचार्य सोमदेव सूरि (टीकाकार: पं. रामचन्द्र मालवीय) द्वारा

DevanagariHindipublished220 पृष्ठ

पृष्ठ 111, कुल 220 में से

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पृष्ठ 111

CC-0. In Public Domain. Digitization by eGangotri
अमात्यसमुद्देशः ६५
प्रबल दल वाला व्यक्ति यदि अमात्यरूप अधिकारी के पद पर नियुक्त
किया जाता है तो वह मतवाले पागल हाथी की भांति जड़सहित राजारूपी
वृक्ष को उखाड़ डालता है।
अल्पायतिर्महाव्ययो अक्षयति राजार्थम् ॥ १६ ॥
थोड़ी आय करके बहुत व्यय करने वाला अमात्य राजा के अर्थ कोष
का नाश कर देता है।
अल्पायुमुखो महाजनं परिग्रहं च पीडयति ॥ १७ ॥
थोड़ी आय वाला अमात्य जनता और राज-परिवार को कष्टकारक
होता है।
नागन्तुकेष्वर्थाधिकारः प्राणाधिकारो वास्ति यतस्ते स्थित्वाऽपि-
गन्तारोऽपकर्त्तारो वा ॥ १८ ॥
परदेशी व्यक्ति को अर्थाधिकार अर्थात् वित्तमन्त्री और प्राणाधिकार
अर्थात् सैन्यमन्त्री नहीं बनाना चाहिए क्योंकि ऐसे आदमी कुछ दिनों तक
काम करने के बाद भी अपने देश चले जाते हैं अथवा राजा का अपकार
करते हैं।
स्वदेशजेष्वर्थः कूपे पतित इव कालान्तरादपिलब्धुं शक्यते ॥ १९ ॥
जिस प्रकार कुंए में गिरी हुई वस्तु या धन किसी समय निकाला भी जा
सकता है उसी प्रकार स्वदेश वासी मन्त्री को अर्थाधिकार देने से उसके द्वारा
गबन किया गया धन कभी न कभी किसी न किसी रूप से वसूल किया जा
सकता है पर जो परदेशी होगा वह तो द्रव्यराशि लेकर अपने देश भाग
जायगा और उससे फिर वह अर्थ नहीं मिल सकेगा।
चिक्कणादर्थलाभः पाषाणाद् वल्कलोत्पाटनमिव ॥ २० ॥
चिक्कण अर्थात् अत्यन्त मृदुस्वभाव वाले मन्त्री से अर्थ लाभ की आशा
करना पत्थर की छाल निकालने के समान है जो अत्यन्त कोमल स्वभाव का
होगा वह कठोरता के साथ कर आदि की वसूली न कर सकेगा और इस
प्रकार राज्य-कोष क्षीण होता जायगा। चिक्कण का कृपण भी अर्थ दिया
गया है।
अधिकारी बनने योग्य व्यक्ति—
सोऽधिकारी यः स्वामिना सति दोषे सुखेन निगृहीतुमनुग्रहीतुं च
शक्यते ॥ २१ ॥
वही व्यक्ति अधिकारी बनने योग्य है जो अपराधी सिद्ध होने पर सुविधा-
पूर्वक दण्डित और पुरस्कृत किया जा सके।
ब्राह्मणः क्षत्रियः सम्बन्धी वा नाधिकर्त्तव्यः ॥ २२ ॥
Nepal Sanskrit University, Balmeeki Campus, Kathmandu