नाट्यशास्त्र: भाग २ (भरत मुनि - प्रदीप हिन्दी व्याख्या सहित: संगीत, वाद्य, ताल एवं रस-विधान)

नाट्यशास्त्र: भाग २ (भरत मुनि - प्रदीप हिन्दी व्याख्या सहित: संगीत, वाद्य, ताल एवं रस-विधान)
Natyashastra Part 2 of Bharata Muni with Pradipa Commentary
महर्षि भरत मुनि (टीकाकार: पं. बाबूलाल शुक्ल शास्त्री) द्वारा
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५४२ | नाट्यशास्त्र
विघूर्णितशरीरा च १४१, १५४ | विनिवृत्तञ्च विधुतं ३१
विचारस्यान्यथाभाव २८२ | विनिवृत्तमसूयायां ३२
[ विचारगहनं यत् ३०२ ] | विनिवृत्ते त्वगसूतं ८७
विचारे विहते चैव ८ | विनिष्क्रामे विसर्गस्तु २९
विच्छेदोऽतिजगत्त्यां २४१ | विनीतवेषश्च भवेत् १४४
विच्यवात् समपादाया ९८ | विपर्ययगतैर्हस्तै १५५
विच्युतश्च सशङ्खश्च ५९, ६४ | विपर्ययः प्रयोक्तव्यः १६८
विच्युतौ चलितावस्थौ ४४ | विपरीतं हमयोगे ३३४
विजयार्थानि नामानि ३५६ | विपरीता न पथ्यासि २६२
विजृम्भितं निःश्वसितं २९५ | विपरीताश्रया हस्ता ७४
विज्ञातव्यं प्रयत्नेन ८१ | विपुलजघनवदन २७१
विज्ञेयं प्राकृतं पाठ्यं ३२५ | विपुला तु युजि ज्ञ