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सर्वकोश
नाट्यशास्त्र: भाग २ (भरत मुनि - प्रदीप हिन्दी व्याख्या सहित: संगीत, वाद्य, ताल एवं रस-विधान)

नाट्यशास्त्र: भाग २ (भरत मुनि - प्रदीप हिन्दी व्याख्या सहित: संगीत, वाद्य, ताल एवं रस-विधान)

Natyashastra Part 2 of Bharata Muni with Pradipa Commentary

महर्षि भरत मुनि (टीकाकार: पं. बाबूलाल शुक्ल शास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished668 पृष्ठ

पृष्ठ 102, कुल 668 में से

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( ६१ )
पादचारी-स्वरूप ( ५५-५६ ) ९४ | आविद्धा चारी लक्षण ( ३८ ) १०२
एकादश अध्याय | उद्वृत्ता चारी लक्षण ( ३९ ) १०२
( चारीविधान ) ( श्लोक १-१०४ ) | विद्युद्भ्रान्ता चारी लक्षण ( ४० ) १०२
अलाता चारी लक्षण ( ४१ ) १०३
चारी-लक्षण ( १ ) ९५ | भुजङ्गत्रासिता चारी लक्षण ( ४२ ) १०३
व्यायाम-लक्षण ( २ ) ९६ | हरिणप्लुता चारी लक्षण ( ४३ ) १०३
चारी तथा करण-लक्षण ( ३ ) ९६ | दण्डपादा चारी लक्षण ( ४४ ) १०३
खण्ड तथा मण्डल-लक्षण ( ४ ) ९६ | भ्रमरी चारी लक्षण ( ४५ ) १०३
चारी-उपयोगिता ( ५-७ ) ९६ | चारी विधि ( ४६-५० ) १०४
भौमीचारी नाम ( ८-१० ) ९७ | स्थान नाम ( ५१ ) १०५
आकाशिकी चारी नाम ( १०-१३ ) ९७ | वैष्णवस्थान-लक्षण तथा योजना
चारी लक्षण | ( ५२-५८ ) १०५-१०६
समपादा लक्षण ( १४ ) ९८ | समपादस्थान-लक्षण योजना
स्थितावर्ता लक्षण ( १५ ) ९८ | ( ५८-६१ ) १०६
शकटास्या लक्षण ( १६ ) ९८ | वैशाखस्थान-लक्षण योजना
अध्यर्धिका लक्षण ( १७ ) ९८ | ( ६१-६५ ) १०७
चाषगति लक्षण ( १८ ) ९८ | मण्डलस्थान-लक्षण योजना
विच्यवा लक्षण ( १९ ) ९९ | ( ६५-६७ ) १०७
एलकाक्रीडिता लक्षण ( २० ) ९९ | आलीढस्थान-लक्षण योजना
बद्धा लक्षण ( २१ ) ९९ | ( ६७-७० ) १०८
ऊरुद्वृत्ता लक्षण ( २२ ) ९९ | प्रत्यालीढस्थान-लक्षण योजना
अड्गिता लक्षण ( २३ ) ९९ | ( ७०-७२ ) १०८
उत्स्पन्दिता लक्षण ( २४ ) ९९ | न्याय-नाम तथा उद्देश्य
जनिता लक्षण ( २५ ) ९९ | ( ७२-७६ ) १०९
स्यन्दिता लक्षण ( २६ ) १०० | भारतन्याय लक्षण
अपस्यन्दिता लक्षण ( २७ ) १०० | ( ७६-८० ) १०९-११०
समोत्सारितमत्तल्ली लक्षण ( २८ ) १०० | सात्वतन्याय लक्षण ( ८१-८२ ) ११०
मत्तल्ली लक्षण ( २९ ) १०० | वार्षगण्यन्याय लक्षण ( ८२-८४ ) ११०
आकाशिकी चारी | कैशिकन्याय लक्षण
अतिक्रान्ता चारी लक्षण ( ३० ) १०१ | ( ८४-८५ ) ११०-१११
अपक्रान्ता चारी लक्षण ( ३१ ) १०१ |
पार्श्वक्रान्ता चारी लक्षण ( ३२ ) १०१ | शस्त्रों की मोक्ष विधि ( ८५-८८ ) १११
ऊर्ध्वजानु चारी लक्षण ( ३३ ) १०१ | सौष्ठव लक्षण ( ८८-९२ ) १११
सूची चारी लक्षण ( ३४ ) १०१ | चतुरस्र लक्षण ( ९२-९३ ) ११२
नूपुरपादिका चारी लक्षण ( ३५ ) १०१ | करण ( ९३-९४ ) ११२
डोलपादा चारी लक्षण ( ३६ ) १०२ | करण के कार्य ( ९४-९५ ) ११३
आक्षिप्ता चारी लक्षण ( ३७ ) १०२ | व्यायामविधि ( ९५-१०२ ) ११३-११४