सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
संक्षिप्त नृसिंह पुराण (सचित्र हिन्दी अनुवाद सहित)

संक्षिप्त नृसिंह पुराण (सचित्र हिन्दी अनुवाद सहित)

Sankshipta Narasimha Purana Gita Press

महर्षि व्यास द्वारा

स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished318 पृष्ठ

पृष्ठ 8, कुल 318 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 8

( ५ )
अध्याय विषय पृष्ठ-संख्या | अध्याय विषय पृष्ठ-संख्या
२७-चन्द्रवंशका वर्णन........................... ९१ | ४६-परशुरामावतारकी कथा .................. १६८
२८-शान्तनुका चरित्र ........................... ९३ | ४७-श्रीरामावतारकी कथा—श्रीरामके जन्मसे
२९-शान्तनुकी संततिका वर्णन ............. ९६ | लेकर विवाहतकके चरित्र ............ १७१
३०-भूगोल तथा स्वर्गलोकका वर्णन..... ९८ | ४८-श्रीराम-वनवास; राजा दशरथका निधन
३१-ध्रुव-चरित्र तथा ग्रह, नक्षत्र एवं पातालका | तथा वनमें राम-भरतकी भेंट ......... १८३
संक्षिप्त वर्णन.................................. १०३ | ४९-श्रीरामका जयन्तको दण्ड देना; शरभङ्ग,
३२-सहस्रानीक-चरित्र; श्रीनृसिंह-पूजनका | सुतीक्ष्ण और अगस्त्यसे मिलना;
माहात्म्य ...................................... ११५ | शूर्पणखाका अनादर; सीताहरण;
३३-भगवान्‌के मन्दिरमें झाडू देने और | जटायुवध और शबरीको दर्शन देना .. १९६
उसको लीपनेका महान् फल—राजा | ५०-सुग्रीवसे मैत्री; वालिवध; सुग्रीवका प्रमाद
जयध्वजकी कथा ......................... ११६ | और उसकी भर्त्सना; सीताकी खोज
३४-भगवान् विष्णुके पूजनका फल ...... १२३ | और हनुमान्‌का लङ्कागमन.............. २०७
३५-लक्षहोम और कोटिहोमकी विधि | ५१-हनुमान्‌जीका समुद्र पार करके लङ्कामें
तथा फल ................................... १२७ | जाना, सीतासे भेंट और लङ्काका दहन
३६-अवतार-कथाका उपक्रम............... १२९ | करके श्रीरामको समाचार देना ....... २१९
३७-मत्स्यावतार तथा मधु-कैटभ-वध ... १३० | ५२-श्रीराम आदिका समुद्रतटपर जाना;
३८-कूर्मावतार; समुद्रमन्थन और मोहिनी- | विभीषणकी शरणागति और उन्हें लङ्काके
अवतार......................................... १३३ | राज्यकी प्राप्ति; समुद्रका श्रीरामको मार्ग
३९-वाराह-अवतार; हिरण्याक्ष-वध ....... १३७ | देना; पुलद्वारा समुद्र पार करके
४०-नृसिंहावतार; हिरण्यकशिपुकी वरदान- | वानरसेनासहित श्रीरामका सुवेल पर्वतपर
प्राप्ति और उससे सताये हुए देवोंद्वारा | पड़ाव डालना; अङ्गदका प्रभाव;
भगवान्‌की स्तुति......................... १३८ | लक्ष्मणकी प्रेरणासे श्रीरामका अङ्गदकी
४१-प्रह्वादकी उत्पत्ति और उनकी हरि- | प्रशंसा करना; अङ्गदके वीरोचित उद्गार
भक्तिसे हिरण्यकशिपुकी उद्विग्नता..... १४३ | और दौत्यकर्म; वानर वीरोंद्वारा राक्षसोंका
४२-प्रह्लादपर हिरण्यकशिपुका कोप और | संहार; रावणका श्रीरामके द्वारा युद्धमें
प्रह्लादका वध करनेके लिये उसके द्वारा | पराजित होना; कुम्भकर्णका वध; अतिकाय
किये गये अनेक प्रयत्न .................. १४८ | आदि राक्षस वीरोंका मारा जाना;
४३-प्रह्लादजीका दैत्यपुत्रोंको उपदेश देना; | मेघनादका पराक्रम और वध; रावणकी
हिरण्यकशिपुकी आज्ञासे प्रह्लादका समुद्रमें | शक्तिसे मूर्च्छित लक्ष्मणका हनुमान्‌जीके
डाला जाना तथा वहीं उन्हें भगवान्‌का | द्वारा पुनर्जीवन; राम-रावण-युद्ध; रावण-
प्रत्यक्ष दर्शन होना.......................... १५२ | वध; देवताओंद्वारा श्रीरामकी स्तुति;
४४-नृसिंहका प्रादुर्भाव और हिरण्यकशिपुका | सीताके साथ अयोध्यामें आनेपर
वध ............................................. १६० | श्रीरामका राज्याभिषेक और अन्तमें
४५-वामन-अवतारकी कथा.................. १६४ | पुरवासियोंसहित उनका परमधाम गमन २२४

In Public Domain. Digitized by Sarvagya Sharda Peeth