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सर्वकोश
मूलमध्यमककारिका (आचार्य नागार्जुन - चन्द्रकीर्ति प्रणीत प्रसन्नपदा व्याख्या सहित)

मूलमध्यमककारिका (आचार्य नागार्जुन - चन्द्रकीर्ति प्रणीत प्रसन्नपदा व्याख्या सहित)

Mulamadhyamakakarika of Nagarjuna with Prasannapada Commentary

आचार्य नागार्जुन (टीकाकार: आचार्य चन्द्रकीर्ति) द्वारा

DevanagariSanskritpublished176 पृष्ठ

पृष्ठ 106, कुल 176 में से

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पृष्ठ 106

the book or "नोत्पद्येत"? It looks like 'नोत्पद्येत' where the त् is tiny, or 'नोपद्येत'. Let's transcribe faithfully as printed: "नोत्पद्येत" or "नोपद्येत" (I will look closely: there is a tiny mark above the left shoulder of प, making it त्प, but let's check).
Wait, look at line 19: "व्ययस्यानुत्पत्तेर्हेतुरुच्छेदः प्रसज्यते ॥ १६ ॥"
Line 22: "स्वभावानुपपन्नत्वात् सर्वधर्माणाम् ।"
Line 25: "[म० शा० - १८.१०]" (Wait, is it १८.१० or १५.१०? It says १५.१०! Let's check: प्रतीत्य यद्यद्भवति न हि तावत्तदेव तत् । न चान्यदपि तत्तस्मान्नोच्छिन्नो नापि शाश्वतम् ॥ That is MMK 18.10? No, MMK 18.10 is: यत्प्रतीत्य समुत्पन्नं न तत् तावत्तदेव तत् । न चान्यत्तन्न चोच्छिन्नं नापि शाश्वतमित्यतः ॥ Wait, what chapter is that? In MMK chapter 18, verse 10 is indeed "प्रतीत्य यद्यद्भवति...". Wait, does it say १५.१० or १८.१०? It says १८.१०, look