मुकुन्दमाला स्तोत्रम् (कुलशेखर आलवार - संस्कृत मूल एवं सान्वय हिन्दी व्याख्या)
Mukundamala Stotram of Kulasekhara Alwar with Commentary
कुलशेखर आलवार (राजा कुलशेखर) द्वारा
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दिवि वा भुवि वा ममास्तु वासो
नरके वा नरकान्तक प्रकामम्,
अवधीरित शारदारविन्दौ
चरणौ ते मरणेऽपि चिन्तयामि.
नरकान्तक = नरकासुरुनि संहरिञ्चिन स्वामी! मम = नाकु, दिवि
वा = स्वर्गमन्दुगानि, भुवि वा = भूलोकमन्दुगानि, नरके वा = नर
कमुनन्दुगानि, वासः = उनिकि, अस्तु = कलुगनि, प्रकामम् = सम्मतमे,
अवधीरित = तिरस्करिम्पबडिन, शारद = शरदृतुवु नन्दु विकसिञ्चिन,
अरविन्दौ = कमलमुलुगल, ते = देवरवारि योक्य्क, चरणौ = पादमु
लनु, मरणेऽपि = मृत्युसमयमुनन्दुगूड, चिन्तयामि = ध्यानिञ्चु
चुन्दुनु.
नरकासुरुनि संहरिञ्चिनवाडा! नाकु स्वर्गमन्दैननु, भूमियं
दैननु, नरकमन्दैननु वासमु कलुगुनुगाक! चिन्तलेदु. शरत्काल
कमलमुलनु तिरस्करिञ्चुनट्टि नीयोक्कि पादमुलनु मरणकालमु
नन्दुनु मिगुल स्मरिञ्चुचुन्दुनु गाक!
स्वामि : धर्मार्थकाममुलनु वलदनुचुन्नावु. धर्ममु चेयनि
पक्षमुन स्वर्गमु लभिञ्चदु.न्दुचेत भूमियन्दे
वासमु गलुगुनु. अन्तमात्रमे कादु. धनलोभमु
द्वारा चेयु पापमुलवलन नरकवासमु गलुगुनु.
कुल : स्वामी! नाकु स्वर्गमन्दैननु, भूमियन्दैननु, नर
कमं दैननु वासमु कलुगुगाक! नाकु ई लोकमु, आ
लोकमु अनु व्यवस्थ युण्डिनगदा? अन्नियु समानमे.
स्वामि : यदि मोसपु माटगा नुन्नदि. कनि नी मनःपूर्वकमैन
माटगा नुण्डलेदु.
कुल : नरकान्तका! अत्यन्तमु सम्मतिञ्चि चेप्पुचुन्नानु.