मुकुन्दमाला स्तोत्रम् (कुलशेखर आलवार - संस्कृत मूल एवं सान्वय हिन्दी व्याख्या)
Mukundamala Stotram of Kulasekhara Alwar with Commentary
कुलशेखर आलवार (राजा कुलशेखर) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें148 मुकुन्दमाल
क्षीरसागर=पालसमुद्रमुनन्दलि, तरंग= अललयोक्क, शीकर=
तुंपुरुलयोक्क, आसार=एडतेगनिवानचेतनु, तारकित=मुत्याल
हारमु धरिंचिनट्लुण्डु, चारु=अन्दमैन, मूर्तये=शरीरमुगल
वाडुनु, भोगि=आदिशेषुनियोक्क, भोग=शरीरमुनेडु, शयनीय=
पाण्पुनन्दु, शायिने=परुण्डिनट्टिनाडु, मधुविद्विषे=मधुवनु राक्ष
सुनि संहरिञ्चिन, माधवाय=माधवुनिकोरकु, नमः=प्रणाममु.
क्षीरसमुद्रमु योक्क अलल तुंपरुलचे व्यापिंपबडिन दिव्यमं
गळ विग्रहमु गलिगिनट्टियु, अनन्तुनि मीद शयनिंचि युण्डुनट्टियु,
मधुवनु राक्षसुनकु शत्रुवैनट्टि श्रीमहामहालक्ष्मीपति कोरकु नमस्कारमु.
कुलशेखरुलु ग्रन्थमुनु समाप्ति चेयदलिचि ये श्लोकमं देमि
तप्पियुण्डुनो यनि भयपडि --
तस्मात् प्रणम्य प्रणिधाय कायं
प्रसादये त्वा महमीश मीड्यम्,
पितेव पुत्रस्य सखेव सख्युः
प्रियः प्रियायार्हसि देव सोढुम्.
अनु भगवद्गीत 11अध्यायमु 44श्लोक प्रकारमु तन तप्पुलु
मन्निंपबडवलयुननि ई श्लोकमुन स्वामिकि नमस्करिंचुचुन्नारु.
यवरिकैननु अत्तवारिण्ट नाडम्बर मधिकमुग नुण्डुनु. औदार्य
मुनु अधिकमुग नुण्डुनु. अन्दुननु मामगारु गोप्पवा डय्येनेनि
अल्लुनिकि मरिंत आडम्बरमु कलगुनु. स्वामिकि मामगारि यिल्लु
क्षीरसागरमु. आ समुद्रुडु रत्नाकरुडु. अनगा रत्नमुलकु स्थानमै
ननाडु.
कुलशेखरुलु अत्तगारिण्टनुण्डु स्वामिनि वर्णिंचि सेविंचु चुन्नारु.
स्वामि क्षीरसागरमुन निवसिञ्चियुन्नारु. अललु कोट्टुचुण्डगा