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मुकुन्दमाला स्तोत्रम् (कुलशेखर आलवार - संस्कृत मूल एवं सान्वय हिन्दी व्याख्या)

मुकुन्दमाला स्तोत्रम् (कुलशेखर आलवार - संस्कृत मूल एवं सान्वय हिन्दी व्याख्या)

Mukundamala Stotram of Kulasekhara Alwar with Commentary

कुलशेखर आलवार (राजा कुलशेखर) द्वारा

DevanagariHindipublished167 पृष्ठ

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१२२ मुकुन्दमाला
२७
मज्जन्मनः फल मिदं मधुकैटभारे
मत्प्रार्थनीय मदनुग्रह एष एव,
त्वद्भृत्य भृत्य परिचारक भृत्यभृत्य
भृत्यस्य भृत्य इति मां स्मर लोकनाथ.
मधुकैटभारे=मधुकैटभुलनु राक्षसुलकु शत्रुवयिनवाఁडा, मज्ज
न्मनः=नायोक्क पुट्टुककु, फलं=प्रयोजनमु, इदं=इदिये, मत्=
नाचेतनु, प्रार्थनीयः=कोरदगिनदियु, मत्=नाविषयमैन, अनु
ग्रहः= अनुग्रहमुनु, एषएव=इदे, लोकनाथ=ओ लोकाधिपती,
मां=नन्नु, त्वत्=देवरवारि, भृत्य=परिचारकुनिय्योक्क, भृत्य=
परिचारकुनि योक्क, परिचारक=भृत्युनिय्योक्क, भृत्य=परिचारकुनि
योक्क, भृत्य= परिचारकुनिय्योक्क, भृत्यस्य=परिचारकुनिय्योक्क,
भृत्यः इति=सेवकडनि, स्मर=तलंचुमु.
ओ मधुकैटभारी! ओ लोकनाथा! नायोक्क जन्ममुनकु इदिये
फलमु. नायन्दु नीवु चूपवलसिन यनुग्रह मिदिये. नन्नु
नीयोक्क दास दास दास दास दास दास दासुडनि तलंपुमु.
स्वामि : श्रीवल्लभेति मोदलु मिगुल स्तोत्रमु चेयुचुन्नावु.
नी केमि कावलयुनो कोरुमु. दानि निच्चेदनु.
कुलशेखरुलु : स्वामी! एन्नि जन्ममुलो एत्तियेत्ति तुदकु ई
जन्म मेत्तितिनि. दीनिकी फलमु नडिगेदनु. वेटेमियु
अडुगनु. अडुगवलसिनदि ओक्कटिये. मीरनुग्रहिंप
वलसिनदियु आ ओक्कटिये. मनुष्यजन्ममुनकु फल
मदिये.
स्वामि : अदेदो चेप्पुमु.